बैकुण्ठपुर। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में हाल ही में पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विनोद राय एक बार फिर विवादों में घिरते नज़र आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन पर पूर्व पदस्थापन स्थलों सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में भी शिकायतें और जांच (पीएल) लंबित हैं। जानकार सूत्र बताते हैं कि सूरजपुर जिले में उनके कार्यकाल के दौरान धनवसूली और कर्मचारियों के उत्पीड़न की चर्चा जोरों पर रही थी। वहीं बलरामपुर में भी उनके खिलाफ कार्यालयी अनुशासन और व्यवहार को लेकर सवाल उठे थे।
बैकुण्ठपुर में नई तैनाती पर भी उठे सवाल
अब, बैकुण्ठपुर में पदभार ग्रहण करने के कुछ ही सप्ताह बाद ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि वे कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, भ्रमण या निजी निवास में अधिक समय बिताते हैं, और कार्यालयीन कार्यों पर कम ध्यान दे रहे हैं। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता “काम से ज्यादा वसूली” बताई जा रही है, जिससे विभागीय माहौल प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा को “व्यापार” बना देने का आरोप
कई सूत्रों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सेवा नहीं, बल्कि कारोबार की तरह चलाया जा रहा है। पदस्थ होने के बावजूद कार्यालय में उपस्थिति बेहद सीमित रहने से शैक्षणिक कार्यों की गति धीमी पड़ गई है।
स्थानीय नागरिकों और विभागीय कर्मचारियों ने कोरिया कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि “यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो शिक्षा विभाग की छवि और जनता का भरोसा दोनों प्रभावित होंगे।” फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, पर विभागीय गलियारों में ‘डीईओ विवाद’ चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।


