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एमसीबी/CG : “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत “हर बालिका राष्ट्र की पूंजी” थीम पर प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन“………….

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शा. कन्या उ.मा.वि. मनेंद्रगढ़ में बालिकाओं ने कहानी लेखन के माध्यम से व्यक्त किए अपने सपनों के भविष्य के विचार

एमसीबी : भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के अंतर्गत बाल दिवस के अवसर पर आज शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (ई-संवर्ग), मनेन्द्रगढ़ में एक प्रेरणादायक और रचनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम “हर बालिका राष्ट्र की पूंजी” रखी गई, जबकि कहानी लेखन प्रतियोगिता का विषय “मेरे सपनों का भविष्य” निर्धारित किया गया, जिसके माध्यम से बालिकाओं को अपने विचारों, सपनों और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर मिला। यह आयोजन जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी आर. के. खाती के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मिशन शक्ति हब की जिला मिशन समन्वयक श्रीमती तारा कुशवाहा द्वारा किया गया।


बालिकाओं की रचनात्मकता और आत्मविश्वास की झलक
बालिकाओं ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी कहानियां प्रस्तुत की, जिनमें उनके उज्ज्वल भविष्य, आत्मनिर्भरता और सशक्त भारत के स्वप्न प्रतिबिंबित हुए। छात्राओं की रचनाओं में शिक्षा, समान अवसर, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य जैसे विषयों को संवेदनशीलता के साथ व्यक्त किया गयज्ञं कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अर्चना वैष्णव एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग से जेंडर विशेषज्ञ सुश्री शैलजा गुप्ता, वित्तीय साक्षरता समन्वयक श्रीमती अनीता कुमारी शाह तथा सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक श्रीमती प्रियंका राजवाड़े की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

बाल सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरक पहल
निर्णायक मंडल द्वारा उत्कृष्ट कहानियों का चयन कर प्रतिभागी बालिकाओं को प्रोत्साहित किया गया। जिला मिशन समन्वयक ने बताया कि इस प्रकार के रचनात्मक आयोजन जिले के अन्य विद्यालयों में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बालिकाओं को अपने सपनों को साकार करने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिल सके।
बाल दिवस के इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्साह, हर्ष और सृजनात्मक ऊर्जा का वातावरण रहा, जहाँ प्रत्येक बालिका की आवाज़ में उसके उज्ज्वल भविष्य की झिलमिलाहट दिखाई दी। यह आयोजन “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की उस भावना का सशक्त प्रतीक बना, जिसने यह संदेश दिया कि हर बालिका वास्तव में राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है।

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