रतलाम नगर निगम के सम्मेलन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन
“रतलाम”(मध्य प्रदेश): नगर निगम द्वारा आयोजित साधारण सम्मेलन और उसके एजेंडों के खिलाफ स्थानीय जनता एवं विपक्षी दलों ने जमकर विरोध किया है। इस विरोध ने धरने-प्रदर्शन का स्वर ले लिया है।
सम्मेलन में पारित प्रस्तावों के अंतर्गत कई कर बढ़ोतरी शामिल थीं — इसमें संपत्ति कर, जल उपभोक्ता प्रभार, पार्किंग शुल्क व अन्य कर/शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव था। जनता तथा कांग्रेस समर्थक पार्षदों का आरोप है कि इन प्रस्तावों को पारदर्शी तरीके से नहीं रखा गया और बजट में “गोलमाल एवं त्रुटिपूर्ण आंकड़े” हैं। विशेष रूप से 104 मदों में आंकड़ों में हेर-फेर की बात कही गई है।
धरना-प्रदर्शन हुआ:
प्रस्तावित “बाजार बैठक वसूली” के खिलाफ निगम गेट पर प्रदर्शन हुआ। व्यवसायी, ठेले-वाले और लोकप्रतिनिधि शामिल हुए। शासन-विभाग ने भी सक्रियता दिखाई है: मध्य प्रदेश नगरीय प्रशासन विभाग ने आयोगित किया है कि बजट व वसूली के प्रावधानों की जांच की जाए, जो कि पूर्व महापौर द्वारा शिकायत के आधार पर हुई। निगम एवं महापौर की ओर से कहा गया है कि कर वृद्धि इसलिए आवश्यक है ताकि शहर-विकास योजनाएं, पार्किंग व सफाई आदि बेहतर ढंग से हो सकें। विपक्ष का कहना है कि पहले सुविधाएं नहीं और अब शुल्क बढ़ा दिए गए।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
यह सिर्फ कर-वृद्धि का मामला नहीं है: यह शहरी शासन, जवाबदेही और जनता-विश्वास का प्रश्न बन गया है। ऐसे समय में जब आमजन मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, कर-वृद्धि अचानक प्रस्तावित होना राजनीतिक विद्रूपता दिखाता है। जब बजट प्रस्तुत किया गया और उसमें त्रुटियों की शिकायत की गई, तब धर-प्रदर्शन ने इसे लोक-रोष का संकेत बना दिया। प्रशासन ने जांच आदेश जारी करके दिखाई है कि मामला सिर्फ विवाद नहीं बल्कि सिस्टम संबंधी खामी भी हो सकती है।



