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रायगढ़/CG : धरमजयगढ़ में Adani Group की खदान योजना पर भूख प्यास और जमीन पर सवाल — जनआक्रोश का लावा चढ़ा!………

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जमीन-जंगल-जवाबदेही की लड़ाई

धरमजयगढ़ (जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़) में अब जन-आक्रोश ऐसे स्वरूप ले रहा है कि स्थानीय आदिवासी-गांव वाले, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्राम सभा मिलकर खदान-योजना के खिलाफ मुखर हो गए हैं।

प्रस्तावित खदान: Ambuja Cements Ltd-(Adani Group समूह) को मिल चुकी कोयला ब्लॉक “Puranga Coal Block” है, जिसमें लगभग 621.331 हेक्टेयर वन भूमि, 26.898 हेक्टेयर गैर-वन भूमि, व 220.796 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है।

विरोध की वजहें:

ये क्षेत्र आदिवासी-बहुल Scheduled Area है, जहाँ जमीन-जल-जंगल पर उनका परंपरागत अधिकार माना जाता है। ग्राम सभा ने विशेष रूप से इस प्रस्तावित खदान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है और जन-सुनवाई रद्द करने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा है कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत दर्ज उनके दावे आज तक नहीं निपटाए गए — इस स्थिति में खदान अनुमति देना अनैतिक और अवैध है।

प्रदर्शन का स्वरूप:

धरमजयगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पंडित पंचायत क्षेत्र से सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया—प्लैकार्ड, नारे-“जल, जंगल, ज़मीन हमारा है” लेकर। उन्होंने कलेक्टर से व्यक्तिगत रूप से मिलने और अपनी समस्याएँ सुनने की मांग की है।

प्रशासन-कंपनी की स्थिति:

स्थानीय प्रशासन ने अभी तक जन-सुनवाई रद्द नहीं की है। कंपनी का दावा है कि अंतर्वर्ती खदान संचालन से बहुत कम विस्थापन होगा और वन मंजूरी के बाद ही काम शुरू किया जाएगा।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

यह सिर्फ “कोयला खदान” नहीं है — यह आदिवासी अधिकार, वन संरक्षण, भूमि-जल-जनजीवन सुरक्षा की लड़ाई है। छत्तीसगढ़ जैसे संसाधन-समृद्ध राज्यों में अक्सर देखा गया है कि उद्योग और वन-भूमि के बीच टकराव बढ़ता है—यहाँ मामला उसी का एक नया रूप है। इस तरह का विरोध सिर्फ स्थानीय नहीं रह जाता—जब जनसमर्थन बढ़ता है तो राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर यह बड़े मुद्दे में बदल जाता है।

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