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बैकुण्ठपुर/कोरिया : फर्जी जाति प्रमाणपत्र का काला खेल! बैतूल से लेकर बैकुण्ठपुर तक एक ही शिक्षिका ने बना डाले दो प्रमाणपत्र — शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप!…………..

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बैकुण्ठपुर/कोरिया। शिक्षा विभाग में एक बार फिर फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में पदस्थ एक महिला शिक्षिका पर दो-दो जाति प्रमाणपत्र बनवाने का गंभीर आरोप लगा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उक्त शिक्षिका ने वर्ष 2008 में बैकुण्ठपुर से जाति प्रमाणपत्र बनवाया था, जबकि वर्ष 2012 में बैतूल (मध्यप्रदेश) से एक और जाति प्रमाणपत्र जारी करवाया गया। अब सवाल यह उठता है कि — एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग जिलों से जाति प्रमाणपत्र कैसे बनवा सकती है?

इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि उक्त शिक्षिका ने इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब 60 लाख रुपये का बैंक लोन भी हासिल कर लिया है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन में हलचल मच गई है।

जानकारी यह भी सामने आई है कि इस संबंध में शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज हो चुकी है और जांच की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। अब बड़ा सवाल यह है कि — यदि जांच में जाति प्रमाणपत्र फर्जी साबित हुआ, तो बैंक का कर्ज कौन चुकाएगा?

इसी बीच जिले के सूरजपुर से भी एक बड़ा खुलासा हुआ है, जहाँ एक शिक्षक की फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। उक्त व्यक्ति मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है, लेकिन दस्तावेजों में उसका निवास बैकुण्ठपुर और जाति सूरजपुर की बताई गई है।

“वशिष्ठ टाइम्स” की जांच टीम ने इन दोनों मामलों की तहकीकात शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे कुछ लोग शिक्षा विभाग में नौकरी कर हर महीने 70 से 80 हजार रुपये तक का वेतन निकाल रहे हैं।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है — या फिर यह फर्जीवाड़ा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

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