बैकुण्ठपुर, जो कभी शांत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता था, आज भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं का गढ़ बन चुका है। वन विभाग अपनी ही जमीन बचाने में नाकाम साबित हो रहा है, जबकि राजस्व और पुलिस विभाग की मिलीभगत से गैरकानूनी कब्जे, वसूली और अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बैकुण्ठपुर मुख्यालय अब बदमाशों और भू-माफियाओं का जन्मस्थल बन गया है। 50 प्रतिशत तक ब्याज पर कर्ज का कारोबार चल रहा है, और प्रशासन इस पूरे खेल पर आँखें मूँदे हुए है। वजह साफ बताई जा रही है — “प्रशासन बिका हुआ है।”
राजस्व विभाग के बाबू से लेकर आरआई और पटवारी तक, कथित रूप से खुलेआम रिश्वतखोरी का खेल खेल रहे हैं। बिना पैसे कोई काम नहीं होता — यही अब विभाग का “अनलिखा नियम” बन चुका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि “बिना लिफाफा दिए फाइल आगे नहीं बढ़ती।” बताया जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की जमीन दूसरे नामों पर चढ़ाई जा रही है, और इस खेल में विभाग के अंदर बैठे कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
पुलिस विभाग की भूमिका भी संदिग्ध
आम जनता का कहना है कि बैकुण्ठपुर पुलिस “चट्टोकारों” को तरजीह देती है — यानी जो शराब, गांजा या नशीली वस्तुओं का अवैध कारोबार करते हैं, वही पुलिस के खास बन जाते हैं। “प्रेस” लिखी गाड़ियों से लेकर “हाई-प्रोफाइल गुर्गों” तक, सभी पर पुलिस की मेहरबानी बरकरार है। वहीं, आम जनता को मामूली बातों पर डंडा झेलना पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक, यह सब उच्च अधिकारियों की लापरवाही और अवैध वसूली के संरक्षण के कारण हो रहा है।
वन विभाग की अपनी जमीन पर ही संकट
सबसे चौकाने वाली बात यह है कि वन विभाग अपनी ही जमीन को नहीं बचा पा रहा। जानकारी के मुताबिक, वन विभाग की लगभग 5 एकड़ भूमि, जो रावट परिवार को वर्ष 1947-48 में नदी किनारे दी गई थी, अब बिक चुकी है।
राजस्व विभाग की त्रुटियों के कारण इस जमीन का रिकार्ड सुधारा नहीं गया, जिससे यह जमीन अब विवादों में घिर गई है। यह मामला पीजी कॉलेज की जमीन की तरह ही गड़बड़ी भरा बताया जा रहा है। कुछ स्थानीय तत्व इस जमीन को अपना बताकर कब्जे की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वन विभाग के पास स्पष्ट रिकार्ड तक नहीं है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
जनप्रतिनिधि, जिनसे जनता न्याय और कार्रवाई की उम्मीद रखती है, वे भी इस पूरे प्रकरण पर मौन साधे बैठे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “जनता जल रही है और नेता तमाशा देख रहे हैं।” क्या कोरिया प्रशासन अब राजस्व और पुलिस विभाग में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा? क्या वन विभाग अपनी जमीन को दोबारा बचा पाएगा?
या बैकुण्ठपुर भ्रष्टाचार की दलदल में और गहराई तक धँस जाएगा? यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।


