बैकुण्ठपुर/कोरिया / जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर इन दिनों एक बड़ी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। चर्चा का विषय है – “जिला जर्नलिस्ट प्रेस क्लब कोरिया” नामक संगठन, जिसके नाम पर अब दो-दो अध्यक्ष बन गए हैं। एक ही संगठन के नाम पर दो अलग-अलग गुट तैयार हो गए हैं, और यही से शुरू हुई है जिले में फर्जी पत्रकारिता की दुकानदारी। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग पत्रकारिता के पवित्र पेशे को अपना व्यवसाय और वसूली का ज़रिया बना चुके हैं। ये लोग त्योहारों के समय – 15 अगस्त, 26 जनवरी, दीपावली, होली, दशहरा, क्रिसमस, मोहर्रम – जैसे मौकों पर बड़े-बड़े बैनर लगाकर सरकारी और निजी संस्थानों से विज्ञापन और चंदा इकट्ठा करते हैं।
विज्ञापन के नाम पर वसूली और फर्जी वरिष्ठ पत्रकारों की भरमार
सूत्रों के मुताबिक, संगठन के नाम पर कई ऐसे लोग “वरिष्ठ पत्रकार” का तमगा लगाकर घूम रहे हैं, जिनका किसी मान्यता प्राप्त समाचार पत्र या चैनल से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। उनके पास ना कोई प्रेस कार्ड, ना कोई रजिस्ट्रेशन, फिर भी वे समाज में पत्रकारिता की आड़ में वसूली करते नज़र आते हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि इन फर्जी पत्रकारों के पास नशे के कारोबार से लेकर अवैध गतिविधियों तक के सबूत मौजूद हैं। यहां तक कि, कुछ तथाकथित पत्रकार ब्राउन शुगर, सिरप, गांजा, और नशीले इंजेक्शन बेचने तक में शामिल हैं।
संगठन के नाम पर ठगी : बेईमानी का खेल
आम जनता में यह चर्चा जोरों पर है कि “पत्रकारिता अब कुछ लोगों के लिए धर्म नहीं, धंधा बन चुकी है।” जो लोग पहले मुर्गा, सब्जी, या शराब बेचते थे, वे अब “प्रेस” लिखी गाड़ी चलाकर खुद को पत्रकार बताते हैं। उनके बड़े-बड़े बैनर और फोटोज़ सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों ने जातिवाद का ज़हर घोलकर समाज को बांटने का प्रयास भी किया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, अब पत्रकारिता में ऐसे चरित्रहीन लोग घुस चुके हैं जिनका मकसद सिर्फ़ पैसा और पहचान बटोरना है।
कलेक्टर और जनसंपर्क विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग
कोरिया की आम जनता ने जिला कलेक्टर और जनसंपर्क अधिकारी से मांग की है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों और संगठनों की गहन जांच कराई जाए।
कलेक्टर से अपील की गई है कि – “जो भी व्यक्ति अपने को वरिष्ठ पत्रकार बताता है, उसके समाचार पत्र, चैनल और रजिस्ट्रेशन की जांच की जाए।” यह भी सामने आया है कि कुछ फर्जी पत्रकार “लोकस्वर” या अन्य नामों से विज्ञापन छापकर पैसे बटोर रहे हैं, जबकि उनका कोई वैध पंजीकरण या आधार नहीं है।
नगर पालिका की दुकानों पर कब्जा और 200-500 रुपये ‘न्यूज़’का कारोबार
सूत्र बताते हैं कि कुछ तथाकथित वेब पोर्टल वाले पत्रकार नगर पालिका की दुकानों पर कब्जा करके बैठे हैं और 200-500 रुपये में ऑनलाइन खबर डालने का धंधा चला रहे हैं। यानी पैसा दो, खबर छपवाओ! यही “फर्जी पत्रकारिता” का नया फार्मूला बन चुका है।
स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा – “जैसे एक मुर्दा कई कफन बदल-बदल कर चलता है, वैसे ही ये लोग चैनल और पोर्टल बदल-बदल कर खुद को नया पत्रकार बताते हैं।” हर सप्ताह नया चैनल, नया लोगो, नया प्रेस कार्ड और वही पुराने चेहरे! यही है बैकुण्ठपुर की पत्रकारिता की सच्ची तस्वीर।
अब जनता का सवाल है कि क्या होम एंड सोसायटी एक्ट के रजिस्ट्रार इन संगठनों पर कार्रवाई करेंगे ? क्या सरकार ऐसे फर्जी संगठनों और अध्यक्षों के खिलाफ ठोस कदम उठाएगी, जो समाज में पत्रकारिता की साख को मिट्टी में मिला रहे हैं ?
जनता की आवाज़ साफ़ है :
“पत्रकारिता समाज की आंख और आत्मा है। अगर ये ही भ्रष्ट हो गई, तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी।” अब देखना यह होगा कि कोरिया कलेक्टर और जनसंपर्क विभाग इस बढ़ते फर्जी पत्रकारिता के जाल पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं। यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।


