जिला कोरिया मुख्यालय में धान खरीदी के उप-पंजीयक पर गंभीर धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि यह अधिकारी लंबे-लंबे पैसे लेकर लोगों की नियुक्ति पहले से तय करता है। लोगों में चर्चा है कि पहले जिन प्रबंधकों और ऑपरेटरों ने धान चोरी कर बेचा थाए अब उसी को “धान सूक्ति” बताकर लीपा-पोती की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, एक वेब पोर्टल संचालक, जो प्रबंधकों से पैसे लेकर फेसबुक पर उनके पक्ष में पोस्ट करता था, इस पूरे खेल में शामिल बताया जा रहा है। सलका धान खरीदी केंद्र में भी पहले ऑपरेटरों पर क्विंटलों धान गमन का आरोप लगा थाए जबकि गिरजापुर केंद्र से भी लाखों के गमन का मामला सामने आया था, जिसमें धान की बोरियां जप्त की गई थीं। इसी तरह जामपारा केंद्र में भी लोगों ने प्रबंधक पर शिकायत की थी। बताया जा रहा है कि संबंधित प्रबंधक चालाक और प्रभावशाली दिमाग वाला व्यक्ति है, जिसके खिलाफ पहले भी खबर प्रकाशित हुई थी। उस समय उसने समाचार संपादक को धमकी तक दी थी। लोगों का आरोप है कि पुलिस विभाग की लापरवाही और बिकाऊ रवैये के कारण ऐसे लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब इन्हीं मामलों को “धान सूक्ति” कहकर छिपाने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कोरिया जिले में एक विशेष समाज के लोगों की धान खरीदी केंद्रों पर मजबूत पकड़ बनी हुई है। पहले उन्हें पूर्व विधायक अम्बिका सिंह देव जी का संरक्षण मिला हुआ थाए अब वर्तमान जनप्रतिनिधियों का भी आशीर्वाद बताया जा रहा है।
जनता के बीच चर्चा है कि प्रबंधक और ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हर साल यही प्रबंधक अपने मनमुताबिक लोगों की नियुक्ति करते हैं और उप-पंजीयक को लाखों-करोड़ों रुपए तक का भुगतान करते हैं। अब सवाल यह उठता है कि, क्या प्रशासन ऐसे भ्रष्ट प्रबंधकों पर शिकंजा कसेगा ? क्या अब भी “धान गमन” को “सूक्ति” बताकर जनता को गुमराह किया जाएगा ?
जनता की मांग है कि सभी भ्रष्ट प्रबंधक और ऑपरेटरों को हटाकर, स्वच्छ छवि के लोगों को नियुक्त किया जाए, साथ ही अब तक गमन किया गया धान वसूल किया जाए
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या सोसाइटी एक्ट का मतलब चोरों को संरक्षण देना और अधिकारियों पर दबाव बनाना है ? क्योंकि कोरिया में धान खरीदी का यह घोटाला अब जनता के गुस्से का कारण बन गया है, और लोग खुलेआम कह रहे हैं अब या तो भ्रष्टाचार खत्म होगा, या फिर जनता जवाब देगी! यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।


