आज पूरे देश में सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं और चंद्र दर्शन का इंतजार कर रही हैं। व्रत का समापन चांद देखने के बाद ही होता है।
अगर आप करवा चौथ की पूजा अकेले कर रही हैं और किसी के साथ करवा बदलने का मौका नहीं मिल रहा है, तो आप माता गौरी के साथ करवा बदल सकती हैं। इसके लिए आप पार्वती माता की तस्वीर या मिट्टी से बनी उनकी छोटी प्रतिमा का उपयोग कर सकती हैं और उन्हें अपने पूजन स्थल पर स्थापित कर सकती हैं।
करवा बदलने की प्रक्रिया में आपको सात बार अपने हाथों को क्रॉस करते हुए करवा घुमाना होता है। इस दौरान आप यह मंत्र बोलें : “ले सुहागन ले करवा, दे सुहागन दे करवा”। यह मंत्र बोलते हुए करवा घुमाने से आपकी पूजा पूर्ण होती है और आपका सुहाग हमेशा बना रहता है। यह प्रक्रिया माता गौरी को साक्षी मानकर पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए। पूजा पूरी होने के बाद करवा को दान कर देना चाहिए, जो इस व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
करवा चौथ की पूजा कैसे करें ?
करवा चौथ की पूजा करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल पर करवा चौथ का कैलेंडर या चौथ माता की छवि लगाएं। इसके बाद एक कलश में पानी भरें और उसमें एक सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और अक्षत डालें। कलश के ऊपर आम या अशोक के 5-7 पत्ते रखें और उसके मुंह को ढककर अक्षत से भर दें। कलश के ऊपर घी का दीपक प्रज्वलित करें। एक मिट्टी या तांबे का करवा लें और उसमें जल भरें। करवे के ढक्कन में चार सींकें लगाएं और उसमें एक चांदी का सिक्का या अंगूठी रखें। करवे के ऊपर मिठाई रखें और उसे ढक दें। इस करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा। एक और करवा तैयार करें जिसे दान किया जाएगा। इस करवे में चावल, बताशे, मिठाई आदि भरें। अगर आप अकेली पूजा कर रही हैं तो दो करवे भरें, एक अपने लिए और एक माता गौरी के लिए। पूजा स्थान पर एक छलनी रखें जिससे आप चंद्रमा और अपने पति को देखकर अर्घ्य देंगी।
करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की विधि
करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की विधि बहुत ही महत्वपूर्ण है। पूजा से पहले करवा चौथ की कथा जरूर सुननी चाहिए। चांद की पूजा के लिए एक थाली तैयार करें जिसमें कलश, रोली, चावल, छलनी, आटे का दीपक और मिठाई रखें। चांद निकलने पर सबसे पहले छलनी से चंद्र दर्शन करें और फिर उसी छलनी से अपने पति के दर्शन करें। इसके बाद कलश से चांद को अर्घ्य दें और दीपक दिखाएं। चांद को मिठाई का भोग लगाएं और चंद्रमा की आरती करें। चंद्रमा पर सात बार गेहूं की बालियां या चावल फेंकें। अंत में अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलें।
करवा चौथ पर चांद न दिखे तो क्या करें ?
करवा चौथ की रात अगर बादलों की वजह से चांद दिखाई न दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में, जब आपको पता हो कि अन्य जगहों पर चांद निकल चुका है, तो आप निर्धारित चंद्रोदय के समय पर ही चंद्रमा का ध्यान मन में करें। इसके बाद पूजा की पूरी विधि के अनुसार चंद्र देव को अर्घ्य दें और मन से उन्हें प्रणाम करें। फिर आप व्रत खोल सकते हैं।
गलती से टूट जाए व्रत तो क्या करें ?
अगर आपका व्रत अनजाने में टूट जाए, तो खुद को दोषी न मानें। इसके बजाय, भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्र देव से क्षमा मांगें। फिर से संकल्प लें और शाम को पूजा अवश्य करें। अगले दिन क्षमा प्रार्थना करें और अपने पति के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को पुनः व्यक्त करें।
करवा चौथ का चांद कब दिखेगा ?
करवा चौथ पर चांद सभी शहरों में रात 8 बजकर 13 मिनट के बाद दिखाई देगा। इससे पहले करवा चौथ की कथा जरूर पढ़ लें।
चांद को अर्घ्य देते समय कौन सा मंत्र बोलें ?
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:



