जिला मुख्यालय एमसीबी के ब्लाॅक खड़गवां के नजदीक रतनपुर के निवास स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत के समय कुछ पत्रकार उनके निवास पर माइक और पाइप लेकर पहुंचे। यह दृश्य चर्चा का विषय बन गया है। वे अपने काम के हिस्से के रूप में मंत्री से सवाल पूछ रहे थे। कुछ पत्रकारों पर आरोप है कि वे दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। क्योंकि वे पत्रकारिता के नाम पर पैसे वसूलते हैं। इसके अलावा, वे हिंदू सेना जैसे संगठनों के नाम पर भी पैसे वसूलते हैं। यह आरोप उनकी निष्पक्षता और ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं।
वहीं संपादक द्वारा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। इसकी वजह यह थी कि मंत्री माइक वाले पत्रकारों के साथ व्यस्त थे। देखा जाये तो स्वास्थ्य मंत्री ने माइक वाले पत्रकारों को प्राथमिकता दी। जबकि प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को समय नहीं दिया गया। इससे लगता है कि मंत्री की प्राथमिकता में माइक वाले पत्रकार अधिक महत्वपूर्ण हैं। वहीं नई पीढ़ी के पत्रकारों पर आरोप है कि वे पत्रकारिता की मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं। वे अपने प्रभाव का उपयोग करके अनुचित लाभ उठा रहे हैं। इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
संपादक ने स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क करने की कोशिश की। वे जिला एमसीबी के कृत्यों के मामले में जानकारी प्राप्त करना चाहते थे। लेकिन मंत्री की व्यस्तता के कारण उन्हें समय नहीं दिया गया।
इसी तरह मनेन्द्रगढ़ में वन विभाग की बैठक के दौरान डीएफओ मनीष कश्यप के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। यह घटना निंदनीय है और इससे आम जनता में आक्रोश है। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने डीएफओ को धमकी दी कि उनका ट्रांसफर करा दिया जाएगा। जिसको स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मनेन्द्रगढ़ के डीएफओ मनीष कश्यप इमानदार और अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर कड़ी नजर रखने वाले अधिकारी हैं। ऐसे अधिकारी दुर्लभ हैं।



