सरगुजा संभाग में छह जिले हैं और पांच मंत्री हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इन मंत्रियों के बीच पक्षपात होता है और इसका प्रभाव क्षेत्र के विकास पर कैसे पड़ता है ? यह सवाल उठना लाजमी है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व योग्य मंत्रियों को क्यों नहीं पूछा गया और अनभिज्ञ व्यक्तियों को मंत्री क्यों बनाया गया ? यह सवाल जनता के मन में कई प्रश्न खड़े करता है। वहीं पूर्व मंत्रियों को उनके अनुभव और ज्ञान के आधार पर महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। क्योंकि उन्हें नए मंत्रिमंडल में शामिल करने से क्षेत्र के विकास में मदद मिल सकती है। बताया जा रहा है कि, नए मंत्रियों की नियुक्ति में कई कारकों का ध्यान रखा जाता है, जैसे कि उनकी योग्यता, अनुभव और क्षेत्र की जरूरतें। लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या इन कारकों को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति की गई है या दबाव में बनाया गया ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरगुजा के राजेश अग्रवाल ने टीएस सिंहदेव को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और अब वे छत्तीसगढ़ शासन में कैबिनेट मंत्री हैं। उनकी जीत को अग्रवाल समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि मंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब उनकी जिम्मेदारी आम जनता की सेवा करने की है, न कि सिर्फ अपने समाज का भला करने की। वहीं क्षेत्र में सड़क निर्माण की समस्या एक बड़ा मुद्दा है, जैसे कि 85 लाख की लागत से बना रोड जो आज गड्ढों में तब्दील हो गया है। लोगों को उम्मीद है कि मंत्री राजेश अग्रवाल क्षेत्र के विकास के लिए काम करेंगे और समस्याओं का समाधान करेंगे।
वहीं छत्तीसगढ़ शासन में वर्तमान में 14 मंत्री हैं, जिनमें से 3 नए मंत्रियों को हाल ही में शामिल किया गया है। इन मंत्रियों को अपने क्षेत्र की जनता की सेवा करने और विकास के लिए काम करने की जिम्मेदारी है। परंतु इनकी स्थिति खाली मंत्री पद पाने का लालसा था। अब इनका भविष्य बतायेगा कि, आम जनता के लिए कितना कार्य कर सकते है या अपना ही भला शूट पहनेंगे। जनता पुछती है कि, सरगुजा संभाग में छः जिले है तो पांच मंत्री क्यों ? एक जिले के लिए क्यों पक्षपात किया गया ? यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाषित किया जा रहा है।



