जिला एमसीबी के वन विभाग में रेंजरों को नई गाड़ियाँ मिलने से उनके काम में सुविधा हो रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये गाड़ियाँ वास्तव में वन संरक्षण के लिए उपयोग की जा रही हैं या स्वयं के उपयोग में लाई जा रही हैं? जानकार सूत्र बताते है कि, रेंजरों को राज्य शासन द्वारा नई गाड़ियाँ दी गई हैं, लेकिन इसका उपयोग वन संरक्षण के लिए नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि रेंजर अपने क्षेत्र को छोड़कर जंगल के बहाने अपने घर या अन्य निजी कामों के लिए निकल जाते हैं। वहीं अधिकांश रेंजर के पद पर डिप्टी रेंजर हैं जो कार्यभार संभाल रहे है जो कि नियम विरूद्ध है। और रेंजर अपने पद का दुरुपयोग करके जंगल की कटाई में मदद करते हैं और अपने निजी हितों को बढ़ावा देते हैं। साथ ही वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को गलत तरीके से बिल बनाने के लिए निर्देश देते हैं। बताया जा रहा है कि, रेंजर जंगल के नाम पर गाड़ियों में डीजल भरवाते हैं और अपने निजी कामों के लिए उपयोग करते हैं। वे अपने ससुराल या साली के घर जाने के लिए भी गाड़ियों का उपयोग करते हैं।
एमसीबी वन विभाग में हाल ही में नये डिप्टी रेंजरों की नियुक्ति हुई है और अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि डिप्टी रेंजर का प्रभार कितने साल या महीने के लिए होगा। नियमों के अनुसार, डिप्टी रेंजर को लंबे समय तक रेंजर का प्रभार नहीं संभालना चाहिए, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि डिप्टी रेंजर पूरी तरह से रेंजर के पद को संभालते हैं। वहीं डिप्टी रेंजर वन विभाग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और उनकी जिम्मेदारी में वन संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और वन संसाधनों का प्रबंधन शामिल है। परंतु डिप्टी रेंजरों पर आरोप है कि उनके उच्च अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध होते हैं, जो उन्हें रेंजर के पद पर बने रहने में मदद करते हैं। यह आरोप लगाया जाता है कि इन संबंधों के कारण डिप्टी रेंजर लंबे समय तक रेंजर का प्रभार संभालते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एमसीबी में एक डिप्टी रेंजर का निवास जनकपुर में निर्माणाधीन है। डिप्टी रेंजर इन्द्रभान पटेल ने बताया कि, जिसकी लागत 12 लाख रुपये बताई जा रही है। निवास के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि निर्माण कार्य में सीमेंट की जोड़ाई ठीक से नहीं की गई है। यहां तक कि, निर्माण में सीमेंट कम और रेत ज्यादा का उपयोग किया गया है, जिससे निवास की मजबूती और स्थायित्व पर संदेह है। यह भी कहा जा रहा है कि निवास शायद तीन साल भी नहीं चल पाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार, इसी प्रकार केल्हारी थाना में लगभग 68 लाख रुपये की लागत से नवीन थाना भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिसका ठेकेदार रायपुर का बताया जा रहा है। निर्माण एजेंसी द्वारा निरीक्षण किए जाने पर यह पता चलता है कि निर्माण में एजेंसी का भी शेयर होता है, जो कमीशन के रूप में लिया जाता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि जमीन का क्षेत्रफल लगभग 1 से 1.5 डिसमिल है। निर्माण की गुणवत्ता की जांच मटेरियल कंट्रोल द्वारा की जा सकती है, जो बताएगा कि निर्माण अच्छा है या घटिया। यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।



