Home एम.सी.बी. एमसीबी/CG : केल्हारी वनपरिक्षेत्राधिकारी नदारद, वन संरक्षण पर प्रभाव ?………….

एमसीबी/CG : केल्हारी वनपरिक्षेत्राधिकारी नदारद, वन संरक्षण पर प्रभाव ?………….

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जिला एमसीबी के समीप केल्हारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी की अनुपस्थिति एक गंभीर मुद्दा है, जो वन संरक्षण और प्रबंधन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। वनपरिक्षेत्र अधिकारी की अनुपस्थिति से वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। यहां तक कि, वनपरिक्षेत्र अधिकारी की भूमिका वन क्षेत्र के प्रबंधन और संरक्षण में महत्वपूर्ण होती है। वे वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को रोकने और वन संपदा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होते हैं। परंतु यहां डिप्टी रेंजर को रेंजर का प्रभार सौंपा गया है, जो नियमों के विरुद्ध है। हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए, डिप्टी रेंजर, रेंजर के पद पर कार्य कर रहा है, जो एक अवैध और अनियमित स्थिति है। जो वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। आरोप है कि पैसे की ताकत के कारण डिप्टी रेंजर रेंजर बनकर बैठा है, जो एक भ्रष्टाचार का मामला है। यदि यह आरोप सच है, तो यह वन विभाग की कार्यप्रणाली में एक गंभीर खामी को दर्शाता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है, जहां डिप्टी रेंजर को रेंजर का प्रभार देने के लिए कथित तौर पर मुख्य प्रधान वन रक्षक को 6 लाख रुपये की रिश्वत दी गई। यह मामला वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है। इस डिप्टी रेंजर पर लापरवाही का आरोप है, जिससे जंगल से बाहर ग्रामीण क्षेत्र में हाथी घूम रहे हैं और ग्रामीणों में दहशत है। आरोप है कि डिप्टी रेंजर अपनी रेंज में नजर नहीं आते, वे हमेशा अपने कार्यालय व रेंज क्षेत्र में नहीं आते है। लेकिन फर्जी बिल बनाने के लिए दो कर्मचारी रखे हुए हैं। यह वन विभाग के नियमों और कानूनों का उल्लंघन है।

मिली जानकारी के अनुसार, वन रक्षक से लेकर डिप्टी रेंजर और रेंजर तक करोड़ों रुपये के अवैध लाभ कमा रहे हैं। वहीं वन विभाग की आय के स्रोतों की जांच करना भी आवश्यक है, जिसमें वन क्षेत्र के पेट्रोल पंप और बसों के संचालन से होने वाली आय की जांच भी होनी चाहिए। साथ ही एसडीओ से लेकर डीएफओ और वन अधिकारी तक की भूमिका की जांच करना भी आवश्यक है, क्योंकि आरोप है कि वे भी इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है, ताकि सच का पता लगाया जा सके। यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

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