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हरतालिका तीज पर शिव-गौरी को लगाएं ये भोग, आज अर्पित करें फुलैरा………….

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आज देशभर में हरतालिका तीज का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे तीजा के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करते हुए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

हरतालिका तीज पारण मुहूर्त

हरतालिका तीज व्रत का पारण 27 अगस्त 2025 की सुबह 05:57 बजे के बाद किया जा सकता है। व्रत पारण के समय जल ग्रहण करने से पहले कुछ मीठा जरूर खा लेना चाहिए।

हरतालिका तीज व्रत का पारण कैसे करना चाहिए

हरतालिका तीज व्रत पारण से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें। फिर सुहाग का सामान किसी महिला को दान करें। इसके बाद कुछ मीठा खाकर अपना व्रत खोल लें।

हरतालिका तीज में पानी कब पी सकते हैं

वैसे तो हरतालिका तीज व्रत में पानी अगले दिन सूर्योदय के बाद ग्रहण किया जाता है। लेकिन जो महिलाएं इतने लंबे समय तक बिना पानी पिए नहीं रह पाती हैं वे महिलाएं शाम की पूजा के बाद जल ग्रहण कर लेती हैं। लेकिन व्रत वाले दिन अन्न का सेवन नहीं करती हैं।

हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती को इन चीजों का लगाएं भोग

. मिठाईयाँ
काजू की बर्फी या काजू कतली, जो भगवान शिव और माता पार्वती को बहुत प्रिय है पेड़ा, बर्फी, या रसगुल्ला भी अच्छे विकल्प हैं
. फलों का भोग
केले, सेब, अनार, अंगूर, और अन्य मौसमी फल भगवान को अर्पित किए जा सकते हैं
. पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर बनाया जाने वाला पंचामृत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है
. नारियल
नारियल शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और इसे भोग में शामिल किया जा सकता है
. सूजी का हलवा
सूजी, घी, पानी और शक्कर से बनाया जाने वाला हलवा एक अच्छा विकल्प है
. पूरी और हलवा
पूरी और हलवा भगवान को अर्पित करने के बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जा सकता है
. लड्डू
बेसन के लड्डू, नारियल के लड्डू, या बूंदी के लड्डू भी अच्छे विकल्प हैं
. खीर
दूध, चावल और शक्कर से बनाई जाने वाली खीर एक पारंपरिक विकल्प है

 

शिव जी की आरती

ॐ जय शिव ओंकाराए स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवए अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

जटा जूट साम्ब सदा नन्द भुंगी।
बामन के संग फिरेए ललिता संग।
लिंग रूप धारीए अर्धांग तारीए
जगत पालन हारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

दारिद्र दहन शिवए जटा में जलए
फन लिपटाए शेष नाग लिपटाए।
विष से भोले भंडारीए सब के हारीए
काल के भी काल खप्पर धारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

ॐ जय शिव ओंकाराए स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवए अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

मृत्युंजय औढरए दैत्य के द्वारए
सद्भाुव में श्रद्धा सबए
पाप का नाशन हारी।
संसार का दुरूख हर्ताए सुख का दाताए
शिव भोले भंडारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

ॐ जय शिव ओंकाराए स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवए अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

त्रिपुरारीए कामारीए गज के हारी।
वृष वाहन धारीए भूतों के स्वामी।
प्रलय के भी कालए काल के भी कालए
जग पालन कर्ता ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

ॐ जय शिव ओंकाराए स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवए अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

हर हर हर महादेवए शम्भोए काशी के।
विश्वनाथए सत्य हैए सत्य हैए
भोले बाबा की आरतीए
जो कोई गावेए सो निष्फल जावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

ॐ जय शिव ओंकाराए स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवए अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा ॥

 

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