जिला मुख्यालय एमसीबी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ कुछ युवा पत्रकारों ने वन विभाग के डीएफओ के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। यह घटना दोनों पार्टियों के नेताओं और पत्रकारों के बीच मतभेदों को उजागर करती है। यहीं नहीं मनेन्द्रगढ़ वन विभाग में एक पत्रकार और उसके जीजा के प्रभाव की खबरें भी सामने आई हैं। आरोप है कि पत्रकार का वन विभाग के अधिकारियों पर काफी प्रभाव है तथा वह अपने जीजा को सूरजपुर वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त करवाने में सफल रहा था। इसके अलावा उसने वन प्राणी के अकाउंट से अपने परिवार के खाते में पैसे ट्रांसफर किए। बाद में उसके जीजा ने सूरजपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर का पद छोड़कर मनेन्द्रगढ़ वनमंडाधिकारी में पोस्टिंग कराई। अब वन विभाग में पत्रकार के जीजा का प्रभाव इतना अधिक बताया जा रहा है कि वह वनमंडलाधिकारी से मिलने आने वालों की जानकारी विस्तार से देता है और किस रेंज में कितनी खामियां हैं इसकी भी जानकारी रखता है। इसके अलावा, उसके संबंध कुछ ऐसे लोगों से भी हैं जो वन विभाग में आरटीआई लगाने का काम करते हैं। इस पूरे मामले में वन विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोप भी लग रहे हैं। बताया जाता है कि, ये व्यक्ति मनेन्द्रगढ़ के सभी नेताओं और पत्रकारों को मोबाईल द्वारा जानकारी भी देता है।
लोगों में इस बात का चर्चा है कि, मुख्य प्रधान संरक्षक और डीएफओ के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। आरोप है कि जीजा के साले पर पैसा उगाही के संबंध में एफआईआर दर्ज हो चुका था जिसका हाई कोर्ट जमानत हुआ जिसमें पूर्व मंत्री एवं और कुछ अन्य लोगों के द्वारा वसूली करने वाले पत्रकार के साथ समझौता कराया गया। और अब डीएफओ पर दबाव बनाया जा रहा है। यह मामला वन विभाग में भ्रष्टाचार और अधिकारियों के बीच तनाव को उजागर करता है। इस मामले में जांच की आवश्यकता है, ताकि यह पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ था और कौन जिम्मेदार है ?
वहीं डीएफओ के स्थानांतरण की चर्चा जोरों पर हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे जुड़े कुछ लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यहां तक कि, वन विभाग में बीजेपी, कांग्रेस और कुछ पत्रकारों के एक साथ आने से कई सवाल उठ रहे हैं। इन सभी को पैसा चाहिए और पैसा न देने पर लोगों को यातना देने के आरोप लग रहे हैं।
भ्रष्टाचार और पत्रकारिता
छत्तीसगढ़ में भू-माफिया और नई पीढ़ी के पत्रकारों का प्रभाव बढ़ रहा है। कुछ पत्रकारों पर आय से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप हैं। क्योंकि कुछ नई पीढ़ी के पत्रकार सालभर भी काम नहीं किये हुए रहते है और वह लगभग 12-15 लाख की कार खरीद रहे है। भारत सरकार को ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। पत्रकारिता में नैतिकता और पारदर्शिता की आवश्यकता है और सरकार को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए । इससे जुड़े पत्रकार का नाम आगे प्रकाशित किया जायेगा। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।



