Home कोरिया बैकुण्ठपुर/कोरिया : राजनितिक नेता व प्रशासन ने दिया अनभिज्ञता का परिचय ?……….

बैकुण्ठपुर/कोरिया : राजनितिक नेता व प्रशासन ने दिया अनभिज्ञता का परिचय ?……….

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मुख्यालय बैकुण्ठपुर में एक समाज जो अयोध्यावासी के नाम से जाना जाता है, जानकार सूत्र बताते है कि, उसने पूर्व में अयोध्यावासी धर्मशाला के नाम से जमीन आवंटित कराई थी। इस जमीन पर तीन मंजिला मकान का निर्माण हो चुका है, लेकिन आज तक कोई भी धर्मशाला में राहगीर ठहरने नहीं आया है। अब इस धर्मषाला में राॅड, सीमेंट, सीट और भी निर्माण कार्य के समान थोक में व्यापार चल रहा है। जो कि प्रशासन की नजर में नहीं है। जिस धर्मशाला का नाम राम जानकी धर्मशाला कहा जाता है। बताया जाता है कि, इस धर्मशाला के आलावा एक आयोध्यावासी के नाम से छत्तीसगढ़ शासन से भी मंजूरी ले लिया गया है। जिसको शासन के पैसे का लगभग 98.93 लाख रुपये अनुमोदित किया गया हैं, जिसका निर्माण कार्य नगर पालिका द्वारा कराया जाएगा। लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं कि इस योजना का ठेका अध्यक्ष के नजदीकी बताए जाने वाले ठेकेदार रजनिश गुप्ता को ही मिलेगा। लोगों का मानना है कि अध्यक्ष और रजनिश गुप्ता के बीच नजदीकी के कारण ही इस योजना का ठेका उन्हें दिया जा सकता है। लोगों ने इस योजना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि इसमें पारदर्शिता नहीं है। लोगों का मानना है कि इस योजना का ठेका बिना किसी निष्पक्ष प्रक्रिया के दिया जा सकता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ सकती है। नगर पालिका की भूमिका भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। नगर पालिका को इस योजना के लिए ठेका देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि ठेका देने की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो।

लोगों में चर्चा है कि अध्यक्ष और ठेकेदार के बीच पार्टनरशिप है और कुछ दलाल नगर पालिका के घटिया निर्माण को अच्छा बता रहे हैं। लोगों को लगता है कि मीडिया के नाम पर गलत वीडियो और समाचार फैलाए जा रहे हैं। यहां तक कि नगर पालिका में एक पत्रकार का पति और दो बेटियां नगर पालिका से पूरा लाभ उठा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पत्रकार कलेक्टर को अपनी मीठी बातों से भ्रमित कर रहे हैं और उनसे समाचार प्रकाशित करवा रहे हैं जिससे उन्हें लाभ मिले। लोगों का मानना है कि ऐसे लोग अपने स्वार्थ में जिले को गढडे में धकेल रहे है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अयोध्यावासी भवन को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों को आश्चर्य है कि धर्मशाला और भवन एक ही समाज के नाम से स्वीकृत कैसे हुए ? लोगों का मानना है कि किसी नेता की अनुशंसा के कारण यह संभव हुआ है। राजस्व विभाग पर दबाव की भी चर्चा है, जिससे यह अनुशंसा की गई होगी। इससे यह साबित होता है कि राजनेता और प्रशासन दबाव में काम कर रहे हैं। लोगों को यह भी आश्चर्य है कि समाज के अन्य व्यक्तियों ने इसके खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई ? यह एक बड़ा सवाल है जो प्रशासन और राजनेताओं की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

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