कोरिया शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैकुण्ठपुर विवादों में घिरा हुआ है। पूर्व प्राचार्य डॉ. अखिलेश चन्द्र गुप्ता के कार्यकाल के दौरान और उनके सेवानिवृत्त होने के बाद भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि पूर्व प्राचार्य ने वर्तमान प्रचार्य की बिना अनुमति के महत्वपूर्ण दस्तावेज जला दिए। एवं सेवानिवृत्त होने के बाद भी पूर्व प्राचार्य महाविद्यालय में आते हैं और दो कमरों में ताला लगा दिया है, जिसे अवैध माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि, पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल के दस्तावेज वर्तमान प्राचार्य को नहीं सौंपे गये हैं, जिससे महाविद्यालय के कामकाज पर असर पड़ रहा है। वहीं पूर्व प्राचार्य डॉ. गुप्ता का महाविद्यालय के प्रति लगाव जगजाहिर हो रहा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में महाविद्यालय में ऐसा क्या कारनामें किये है ? उन्होंने बिना सहमति और अनुमति के कागजात जला दिए, जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं। यह एक गंभीर मामला है, जिसमें जांच की मांग की जा रही है।

पूर्व प्राचार्य की तानाशाही और हेराफेरी के आरोप
पूर्व प्राचार्य की आदतें और उनके कार्यकाल के दौरान की गई अनियमितताएं अब सामने आ रही हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में करोड़ों का हेराफेरी किया है, जो कि जांच का विषय है। यहां तक कि, पूर्व प्राचार्य की पत्नी, जो कि महाविद्यालय में प्रोफेसर हैं, उन पर भी आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग करके बड़े बाबू आरिफ को नौकरी लगवाने में मदद की और खुद भी प्रोफेसर बनीं। जानकार सूत्र बताते है कि, पूर्व प्राचार्य की पत्नी बचरापोंडी महाविद्यालय और बैकुण्ठपुर महाविद्यालय दोनों में पदस्थ हैं।

बताया जा रहा है कि, यह घटना तब हुआ जब वर्तमान प्राचार्य महाविद्यालय में नहीं थे तब इस मामले को लेकर वर्तमान प्राचार्य ने लिखित में जानकारी भी दी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि, पूर्व प्राचार्य अपनी पत्नी को प्राचार्य के रूप में देखना चाहते हैं जो कि एक अनुचित मंशा है।

जानकार सूत्र बताते है कि, पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल में करोड़ों का फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें फर्नीचर और अन्य सामग्री भी शामिल है। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके यह घोटाला किया है। इस मामले में जांच की मांग की जा रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। और राज्य शासन और प्रशासन को पूर्व प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और जांच के बाद दोषियों को सजा देनी चाहिए। इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी अभी अप्रयाप्त है साथ ही यह जानकारियाँ महाविद्यायल के किस व्यक्ति द्वारा दी गई थी ? टीम जांच के बाद प्रकाशित किया जायेगा।


