पत्रकारों के साथ बदसलूकी के एक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें संचालक वसीम भी शामिल है। आरोपियों पर पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट करने का आरोप है।
मिली जानकारी के अनुसार, चार आरोपियों को आज न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, इन आरोपियों में मुख्य आरोपी वसीम अकरम भी शामिल है, जिसने कथित तौर पर पत्रकारों पर बंदूक तानी थी, ये सभी आरोपी प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल मेकाहारा की सुरक्षा में बाउंसर के रूप में तैनात थे, कोर्ट में आज सुनवाई नहीं हो सकी, जिसका कारण एक सीनियर वकील का निधन बताया जा रहा है, अब इन सभी आरोपियों को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में रहना होगा।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल मेकाहारा में चाकूबाजी की एक घटना हुई। पत्रकार इस घटना के पीड़ित और उनके परिवार से जानकारी लेने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। मीडिया रिपोर्ट्स और पत्रकारों के बयानों के अनुसार, इसी दौरान अस्पताल की सुरक्षा में तैनात बाउंसरों ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोका और उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी। आरोप है कि बाउंसर वसीम अकरम और उसके तीन साथियों ने पत्रकारों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। बात यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि आरोपियों ने पत्रकारों को बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया और पत्रकारों में दहशत फैल गई। यह घटना सीधे तौर पर प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला थी, जिसने पूरे पत्रकार समुदाय को एकजुट कर दिया।
पत्रकारों को बैठना पड़ा धरने पर
पत्रकारों को मिली जान से मारने की धमकी और बदसलूकी के बाद राजधानी के पत्रकार एकजुट हुए। उन्होंने इस घटना को गंभीरता से लिया और तत्काल पुलिस और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। जब उनकी मांग पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई। तो सभी पत्रकार अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए।
पुलिस ने निकाला जुलूस
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तत्काल हरकत में आई। मामला चूंकि सीधे तौर पर पत्रकारों से जुड़ा था और इसमें जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर धाराएं शामिल थीं, इसलिए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और पत्रकारों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान की। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद, उनका मूंडन करा कर दो किलोमीटर तक जुलूस भी निकाला। पुलिस का यह कदम अपराधियों को सख्त संदेश देने और जनता में विश्वास बहाल करने के उद्देश्य से था कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



