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बैकुण्ठपुर/कोरिया : कोरिया प्रशासन एवं दिनेश चंद्र गुप्ता के दबाव में संपादक पर आये-दिन हो रहे प्रतीघात ?……………

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मुख्यालय बैकुण्ठपुर में आय-दिन तालाब के निस्तार को लेकर निरंतर समाचार प्रकाशन होता आ रहा है जिसको लेकर दिनेश चंद्र गुप्ता द्वारा संपादक और उनके परिवार को धमकियां दी जा रही है। इस संबंध को लेकर पूर्व और वर्तमान में भी कोरिया प्रशासन को शिकायत करते-करते संपादक का परिवार त्रस्त हो चुका है। क्या समाचार प्रकाशन करना अपराध है ?

बता दें कि, संपादक समाचार संकलन के लिए बैकुण्ठपुर कोरिया से बाहर रहते है तो उनके परिवार की महिलाओं को प्रताड़ित आय-दिन किया जाता है। इस संबंध में महामहीम राष्ट्रपति भारत सरकार दिल्ली व माननीय प्रधानमंत्री दिल्ली, माननीय मुख्यमंत्री रायपुर व श्रीमान् राज्यपाल रायपुर को पत्र द्वारा सूचना दिया गया है क्योंकि कल दिनांक 21/05/2025 को वशिष्ठ टाइम्स संपादक के पुत्र अंकित वशिष्ठ को दिनेश चंद्र गुप्ता द्वारा जान से मारने की धमकी दिया गया। इस संबंध में एएसआई आदित्य सिंह को मोबाईल पर संपादक ने धमकी देने की जानकारी भी दी गई। जिसको पूर्व में मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ शासन मंत्रालय द्वारा अवगत कराया गया है समाचार प्रकाशन को लेकर संपादक व उनके परिवार को किसी प्रकार की धमकी मिलती है तो प्रशासन उस संपादक एवं उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करेंगे। पर दिनेश चंद्र गुप्ता का परिवार भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण प्रशासन पर दबाव बनाये हुए है। जानकार सूत्र बताते है कि, इसका प्रमाण कृषि विभाग के उपसंचालक स्व. श्याम कुमार जब जीवित थे तो उनको लगभग 18 लाख की कार दिया गया था क्योंकि वह करोड़ों की हेरा-फेरी में संलिप्त थे तभी तो कार दिया गया था। इसी प्रकार उपसंचालक दीवान जब बैकुण्ठपुर में पदस्थ थे उस वक्त में भी करोड़ो की हेरा-फेरी किया गया। आज बताया जाता है कि, यह व्यक्ति लगभग 70 करोड़ का आसामी बन चुका है। जो कि प्रशासन पर दबाव बनाये हुए है।

जानकार सूत्र बताते है कि, दिनेश चंद्र गुप्ता के इशारे पर नगर पालिका अनियमित रूप से लगभग 28 लाख का बाई सागर तालाब में रोड निर्माण कराया गया। और इस संबंध को लेकर पुलिस प्रशासन को समय-समय पर संपादक द्वारा जानकारी भी दिया गया, पर पुलिस प्रशासन मौन क्यों ? साथ ही समाचार पत्र स्वतंत्र रूप से प्रकाशित करने में यह लोग बाधा उत्पन्न कर रहे है। वहीं धारा 32 छत्तीसगढ़ भू-संहिता में उल्लेख है कि, राजस्व विभाग को अधिकार है कि, किसी व्यक्ति के घर का निस्तार का पानी रोका जाता है तो उसके ऊपर कार्यवाही करने का प्रावधान है। तथा धारा 33 में सुखाचार अधिनियम में किसी भी व्यक्ति की स्वत्रंता पानी एवं रास्ता रोका नहीं जा सकता। पर नियम तोड़ने पर भी कोरिया प्रशासन द्वारा कार्यवाही न करना एक आश्चर्य की बात है। शासकीय दस्तावेज सन् 1947-48 बाईसागर तालाब के रिकाॅर्ड में उल्लेख है कि, यह भूमि निस्तार, तालाब, जानवरों के पानी पीने, कपड़ा धोने, नहाने और हर व्यक्ति को निस्तार करने का हक है परंतु पूर्व के अधिकारियों ने पैसे के बल पर सुप्रीम कोर्ट के निमयों की धज्जियां उडा दी गई।

जानकार सूत्र बताते है कि, बड़ी ताज्जुब वाली बात है वर्तमान प्रशासन के आरआई शर्म की सभी सीमा तोड़ते हुए राष्ट्रीय स्तर के संपादक से जमीन संबंध में लगभग 2 लाख रूपये मांगा गया। जिस संबंध में मौखिक रूप से कोरिया प्रशासन को बताया गया। पर पैसा न देने के कारण आज तहसीलदार, नायब तहसीलदार व आरआई तालाब व निस्तार को छिपा लिये। और गलत जानकारी दे दिया गया कि, नाली व पानी निकलने के लिए 3 फुट की जमीन व निकलने के लिए रास्ता दिया जाये और किसको दिया जाये और किसको नहीं दिया जाये उसमें उल्लेख नहीं दिया गया। उस आधार को बनाकर आयुक्त के आदेश अनुसार लिखा गया था कि, तालाब व निस्तार अवैध रूप से निर्माण कराया जा रहा है उसे रोक कर अम्बिकापुर कार्यालय को अवगत कराये। पर लोगों में चर्चा है कि, राजस्व विभाग सभी नियम को ताक पर रख कर पैसे के बल पर फैसला करता है। यह कोरिया प्रशासन संपादक पर व उनके परिवार पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो बैकुण्ठपुर प्रशासन इसका जिम्मेदार होगा।

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