लोगों में चर्चा है कि, लोकल के पुलिस कर्मियों को सभी ब्याजखोरों का व्यापार मालूम होता है फिर भी संबंध बनाकर रखे हुए है। कुछ लोग तो चार चक्का वाहन में गांजा, ब्राउन शुगर और भांग थोक में सप्लाई कर रहे है। कुछ सोसायटियों में फर्जी बिल लगा-लगाकर करोड़ों रूपये निकाल रहे है। इसके बावजूद भी पुलिस नाकाम हो रही है क्यों ? क्योंकि पुलिस की ही छत्रछाया इन पर बनी हुई है।
वहीं बता दें कि, पूर्व में अजय साहू से संबंधित लोगों के विचारधाराओं द्वारा समाचार प्रकाशित किया गया था उस समाचार को लेकर अयज साहू के द्वारा जो धमकी दिया गया था उस वीडियों रिकाॅडिंग व काॅल रिकाॅडिंग को पुलिस अधीक्षक व थाना प्रभारी को भी सुनाया गया है। तथा इसकी शिकायत दिल्ली एवं रायपुर में भी लिखित रूप से शिकायत किया गया है। पर पुलिस विभाग शांत क्यों ? या किसी राजनितिक व पैसे के बल पर दबाव है ? लोगों में चर्चा है कि, जब उनके परिवार में ही इतनी बड़ी घटना षणयंत्र रच कर की गयी तो किसके बल पर उसके भाई का पोस्टमाॅटम नहीं किया गया ? यह जांच का विषय है। ऐसे बदमाश और गुंडे व्यक्ति को संरक्षण देना। यह न्याय उचित नहीं है। यह व्यक्ति कभी भी कोरिया जिले के लिए दुर्घटना का विषय बन सकता है। शिकायत की काॅपी इस समाचार के साथ संलग्न है।