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मध्यप्रदेश, 15वें वित्त आयोग की जानकारी पर पंचायत की टालमटोल, RTI कानून की भावना पर सवाल

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एक आवेदन में अधिक जानकारी का हवाला देकर रिकॉर्ड देने से इंकार; प्रथम अपील की तैयारी, जिला पंचायत से निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग

मध्यप्रदेश, जयसिंहनगर (शहडोल)

ग्राम पंचायत सीधी में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त राशि, कराए गए विकास कार्यों तथा व्यय संबंधी अभिलेखों की जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगे जाने के बावजूद आवेदक को अपेक्षित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।

इसके बजाय पंचायत स्तर से यह तर्क दिया गया कि आवेदन में एक से अधिक विषयों से संबंधित जानकारी मांगी गई है, इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

इस जवाब के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।

आवेदक ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 15वें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान, स्वीकृत एवं पूर्ण कराए गए निर्माण कार्यों, भुगतान विवरण, माप पुस्तिका (एम.बी.), संबंधित अभिलेखों तथा प्रमाणित प्रतियों की मांग की थी। यह जानकारी सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित होने के कारण स्वभावतः सार्वजनिक अभिलेखों की श्रेणी में आती है।

RTI कानून की भावना क्या कहती है?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 3 प्रत्येक नागरिक को सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करती है। वहीं धारा 2(एफ) और धारा 2(जे) के अनुसार किसी लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों, प्रतियों तथा रिकॉर्ड का निरीक्षण और प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करना नागरिक का वैधानिक अधिकार है।

यदि आवेदन विस्तृत था, तब भी लोक सूचना अधिकारी के पास यह विकल्प उपलब्ध था कि वह उपलब्ध अभिलेखों की सूचना उपलब्ध कराए, अभिलेखों का निरीक्षण कराए या आवश्यकतानुसार अतिरिक्त शुल्क की सूचना देकर रिकॉर्ड उपलब्ध कराए। केवल “एक आवेदन में अधिक जानकारी” का सामान्य आधार बताकर सूचना देने से इंकार करना प्रत्येक मामले में स्वतः वैध नहीं माना जा सकता। यह प्रश्न अंततः अपीलीय प्राधिकारी या सूचना आयोग के समक्ष तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर परखा जाता है।

पारदर्शिता की कसौटी पर पंचायत व्यवस्था
15वें वित्त आयोग की राशि सीधे ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाओं पर खर्च की जाती है। ऐसे में खर्च से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक जांच के दायरे में आते हैं।

यदि सूचना मांगने वाले नागरिकों को रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न होती हैं, तो इससे पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रशासन की अवधारणा प्रभावित हो सकती है।

प्रथम अपील की तैयारी
सूचना से असंतुष्ट आवेदक अब सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर करने की तैयारी कर रहा है। अपील में यह मांग की जाएगी कि मांगी गई सूचनाएं निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएं तथा यदि सूचना रोकी गई है तो उसके विधिसम्मत कारण स्पष्ट किए जाएं।

जिला पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जिला पंचायत शहडोल तथा संबंधित सक्षम अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि ग्राम पंचायत स्तर पर सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन उसकी मूल भावना के अनुरूप हो।

यदि कहीं प्रक्रियागत त्रुटि हुई है तो उसका समयबद्ध निराकरण किया जाए, जिससे ग्रामीणों का शासन व्यवस्था पर विश्वास बना रहे और सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

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