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सोनहत के घने वनांचल में स्थित गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान–टाइगर रिजर्व प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

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गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान–टाइगर रिजर्व: अपार संभावनाओं का वन क्षेत्र, बेहतर बजट और संसाधनों से बन सकता है देश का प्रमुख

विशेष संवाददाता: निलेश सोनी
सोनहत, जिला कोरिया
(छत्तीसगढ़)

में मुख्य प्रवेश द्वार, वन विभाग के कार्यालय, वॉच टॉवर, बलमगढ़ी नेचर ट्रेल, सूचना बोर्ड तथा सघन वन क्षेत्रसुव्यवस्थित दिखाई देते हैं, जो इस क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं।

         

हाल के वर्षों में इस संरक्षित क्षेत्र को गुरु घासीदास–तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। यह भारत का 56वाँ टाइगर रिजर्व है और देश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

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पर्यटन और स्थानीय विकास की अपार संभावनाएँ
यदि इस क्षेत्र में पर्याप्त बजट, आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ, बेहतर सड़क संपर्क, जंगल सफारी, प्रशिक्षित गाइड, ईको-हट, सूचना केंद्र, डिजिटल प्रचार और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं का विस्तार किया जाए, तो यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

वन विभाग के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
विशाल वन क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा।

वन्यजीवों की नियमित मॉनिटरिंग।
सीमित संसाधनों में गश्त और संरक्षण कार्य।

दूरस्थ क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती और सुविधाओं का अभाव।

पर्यटन अवसंरचना का सीमित विकास।

बरसात के मौसम में आवागमन और रखरखाव की कठिनाइयाँ।

मजबूत बजट से मिल सकते हैं बड़े लाभ
यदि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए तो—
पर्यटन से स्थानीय रोजगार बढ़ेगा।
होटल, होम-स्टे, परिवहन और स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी।
वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।

वन विभाग को आधुनिक वाहन, उपकरण, संचार व्यवस्था और निगरानी प्रणाली उपलब्ध हो सकेगी।

स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से संरक्षण और विकास दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

वन्यजीवों का सुरक्षित आवास
यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय सहित अनेक वन्यजीवों और पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास माना जाता है।

घने साल वन, पहाड़ियाँ और प्राकृतिक जल स्रोत इसे जैव विविधता की दृष्टि से विशेष बनाते हैं। �
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गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान केवल एक संरक्षित वन क्षेत्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर है।

योजनाबद्ध निवेश, बेहतर अधोसंरचना और वन विभाग को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराकर इसे देश के प्रमुख वन पर्यटन स्थलों में विकसित किया जा सकता है। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी नई दिशा मिलेगी।

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