कोरिया:दुर्गम क्षेत्रों में मौसम, लंबी दूरी और सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाओं और बच्चों तक पोषण एवं सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
विशेष संवाददाता
नीलेश सोनी
कोरिया (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ जिला कोरिया अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और वनांचल क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। इसी सुंदर लेकिन दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग के सेक्टर सुपरवाइजर तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। वनांचल क्षेत्रों में कार्य करना आसान नहीं है। कई गांव मुख्य मार्गों से दूर स्थित हैं, जहां बरसात के मौसम में सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे समय में भी सेक्टर सुपरवाइजर नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, मार्गदर्शन तथा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हैं।
विभागीय नियमों के अनुसार सुपरवाइजर को अपने मुख्यालय में निवास करना होता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे समय पर क्षेत्रीय कार्यों का संचालन कर सकें। दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद अनेक सुपरवाइजर अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए विभागीय कार्यों को गति दे रहे हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, गर्भवती माताओं, धात्री माताओं और बच्चों तक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।नियमित वजन मापन, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, पूरक पोषण वितरण, प्रारंभिक बाल शिक्षा तथा विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण की रोकथाम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विभागीय अमले का जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना अत्यंत आवश्यक है।इसी उद्देश्य से समय-समय पर पोषण अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जाता है।

स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि वनांचल क्षेत्रों में सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अनेक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सेक्टर सुपरवाइजर पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यदि उन्हें बेहतर आधारभूत सुविधाएं, सुरक्षित आवागमन, पर्याप्त संसाधन तथा प्रशासनिक सहयोग मिले, तो विभाग की योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।
जनहित की दृष्टि से महिला एवं बाल विकास विभाग की यह जमीनी कार्यप्रणाली मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण सुधार और ग्रामीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है। वनांचल क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण को प्रोत्साहन मिलना न केवल विभाग बल्कि समाज के लिए भी सकारात्मक पहल साबित हो सकती है।

