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एमसीबी -‘हर बूंद के मोल’ से जल क्रांति की ओर एमसीबी: ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान बनेगा जन आंदोलन 680 से अधिक माइक्रो वॉटरशेड क्षेत्रों में जल संवर्धन की व्यापक कार्ययोजना, कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने कहा – “जल संरक्षण ही भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा“………….

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एमसीबी/25 जून 2026/ बदलती जलवायु, अनियमित वर्षा और बढ़ते जल संकट के बीच मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला प्रशासन ने जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के माध्यम से जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। इसी कड़ी में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल सुरक्षा को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम, अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार, सभी एसडीएम, जनपद पंचायतों के सीईओ, तकनीकी अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर सुश्री जांगड़े ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जल संरक्षण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक गांव में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे एक सामाजिक अभियान का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरचनाओं का निर्माण तभी सार्थक होगा जब समाज स्वयं उनकी सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाए।

उच्च वर्षा वाला जिला, फिर भी गर्मियों में जल संकट
कार्यशाला में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार एमसीबी जिला औसतन 1154 मिमी वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है तथा लगभग 59 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। इसके बावजूद वर्षा जल का बड़ा हिस्सा बहाव के रूप में जिले से बाहर निकल जाता है, जिससे गर्मी के मौसम में कई क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति निर्मित हो जाती है। अधिकारियों ने बताया कि मानसून के सीमित दिनों में होने वाली भारी वर्षा को संरक्षित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

माइक्रो वॉटरशेड मॉडल बनेगा जल संरक्षण का आधार
बैठक में भरतपुर, खड़गवां और मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के 680 से अधिक माइक्रो वॉटरशेड क्षेत्रों को चिन्हित कर जल संरक्षण कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। प्राकृतिक जल प्रवाह के अनुरूप जल संग्रहण और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक एवं स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित मॉडल अपनाने पर जोर दिया गया।

गांव-गांव में बनेंगी जल संरक्षण की संरचनाएं
अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, खेत तालाब, कंटूर ट्रेंच, गली प्लग, परकोलेशन टैंक, स्टॉप डेम, एनीकट, चेक डेम, गेबियन संरचनाएं, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, जलाशयों का पुनर्जीवन तथा नालों के उपचार जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जाएगा। इससे न केवल जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी बल्कि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

जल संरक्षण के साथ हरियाली का भी संकल्प
कलेक्टर ने कहा कि जल और जंगल एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए अभियान के तहत बड़े पैमाने पर नर्सरी विकास एवं वृक्षारोपण किया जाएगा। जल स्रोतों के आसपास नीम, पीपल, आम, अमरूद, कटहल एवं अन्य उपयोगी पौधों का रोपण कर हरित आवरण बढ़ाया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी और जल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

एल-नीनो जैसी चुनौतियों से निपटने की तैयारी
बैठक में विशेषज्ञों द्वारा एल-नीनो और जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों पर भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि संभावित सूखे और वर्षा की अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि कृषि, पेयजल और ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।

जनभागीदारी होगी अभियान की सबसे बड़ी ताकत
कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं, विद्यार्थियों एवं सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने प्रत्येक गांव में ‘जल मित्र’, ‘युवा जल प्रहरी’ तथा ग्राम जल समितियों के गठन पर जोर देते हुए कहा कि जनता की भागीदारी ही इस अभियान की वास्तविक सफलता तय करेगी। बैठक के अंत में कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने कहा कि हर बूंद अनमोल है। आज जल बचाने का संकल्प ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करेगा। ‘मोर गांव मोर पानी’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास का जनआंदोलन है। जनभागीदारी से एमसीबी जिला जल संरक्षण का आदर्श मॉडल बनेगा।

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