सूरजपुर/19 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने खरीफ वर्ष 2026 से कृषक उन्नति योजना के क्रियान्वयन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योजना के स्वरूप में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को अधिक आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
राज्य का अधिकांश कृषि क्षेत्र वर्षा आधारित होने तथा कृषि आदानों की लागत में लगातार वृद्धि के कारण किसानों की आय प्रभावित होती है। किसानों को उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्र एवं आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा खरीफ 2023-24 से कृषक उन्नति योजना संचालित की जा रही है। अब खरीफ 2026 से योजना नए दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होगी।
योजना का मुख्य उद्देश्य फसल क्षेत्र, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना, खेती की लागत कम कर किसानों की आय बढ़ाना, उन्नत कृषि तकनीकों में निवेश को बढ़ावा देना तथा बाजारोन्मुखी फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।
योजना का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पर पंजीयन कराया हो। इसके अंतर्गत पिछले खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले ऐसे किसान, जो आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य फसल लेने हेतु पंजीयन कराएंगे, पात्र होंगे। इसके अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास की खेती करने वाले किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा।
धान छोड़ अन्य फसल लेने पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता नए दिशा-निर्देशों के अनुसार विगत खरीफ में धान की खेती करने वाले किसान यदि आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य फसल लेते हैं, तो एग्रीस्टेक पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे की पुष्टि होने पर उन्हें 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
जो किसान पहले से ही दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं, उन्हें पूर्ववत 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि दी जाएगी।
योजना के तहत सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जमा की जाएगी। पात्रता एवं रकबे की पुष्टि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर की जाएगी। जहां डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा उपलब्ध नहीं होगा, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति से गिरदावरी के आधार पर सत्यापन किया जाएगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट, मंडल, निजी कंपनियां, शाला विकास समितियां, केंद्र एवं राज्य शासन के संस्थान, महाविद्यालय तथा अन्य विधिक संस्थाएं योजना के लाभ के लिए पात्र नहीं होंगी।
योजना का क्रियान्वयन एवं किसानों को आदान सहायता राशि का वितरण कृषि विभाग द्वारा किया जाएगा। साथ ही योजना की नियमित समीक्षा, अनुश्रवण तथा पात्र किसानों को एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी विभाग की होगी।
राज्य सरकार का मानना है कि कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा, किसानों की उत्पादन लागत में कमी आएगी तथा उनकी आय में वृद्धि होगी। इससे कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाने में सहायता मिलेगी।

