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सूरजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सवालों की बौछार, व्यवस्थाओं से लेकर नियुक्ति और भुगतान प्रक्रिया तक जांच की मांग तेज स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, साफ-सफाई और पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न, नागरिकों में बढ़ा असंतोष…………..

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Report Nilesh sony

सूरजपुर।

जिला मुख्यालय सूरजपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों के बीच कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, संविदा नियुक्तियों तथा वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, जिसके चलते अब निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।

बताया जा रहा है कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अस्पताल भवन होने के बावजूद परिसर में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर गंदगी और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी नहीं की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति और कार्यशैली को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अधिक गंभीरता जरूरी है।

संविदा नियुक्तियों पर उठे सवाल
क्षेत्र में संविदा के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोगों का आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और परिचितों को प्राथमिकता दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं। नागरिकों का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और योग्यता आधारित होनी चाहिए।

भुगतान प्रक्रिया पर भी संदेह
स्वास्थ्य विभाग में भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न योजनाओं और कार्यों के भुगतान में पारदर्शिता की कमी की आशंका जताई जा रही है। नागरिकों ने मांग की है कि भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और बिलों की गहन जांच कराई जाए तथा रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

अधिकारी की कार्यशैली पर चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष है। कुछ लोगों ने प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में अनियमितताओं की आशंका जताई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जांच की मांग हुई तेज
इन सभी मुद्दों को लेकर अब क्षेत्र में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन, नियुक्तियों और वित्तीय प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

सीएमएचओ पर टिकी निगाहें
अब लोगों की नजर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पर टिकी हुई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सूरजपुर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इन आरोपों की सच्चाई अब जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल, जनता पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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