जशपुर (विशेष संवाददाता):
Nilesh Sony
जिला मुख्यालय जशपुर स्थित उद्यानिकी विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विभागीय बागानों से आम, लीची एवं अन्य फलों की बिक्री को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का आरोप है कि विभाग द्वारा लाखों रुपये की बिक्री की जा रही है, लेकिन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है।
जानकारी के मुताबिक, हाल ही में पदस्थ उप संचालक के कार्यकाल में विभागीय बागानों से बड़े पैमाने पर फलों की बिक्री की गई है। हालांकि, बिक्री से प्राप्त राशि, उसके उपयोग और पूरी प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विभागीय कार्यवाही पूरी तरह नियमों के तहत हो रही है, तो रिकॉर्ड सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की हिचक नहीं होनी चाहिए। पारदर्शिता की कमी के कारण ही इस पूरे मामले को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है।
श्रमिक भुगतान और उपस्थिति पर भी सवाल
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। क्षेत्र के लोगों ने मजदूरों की उपस्थिति पंजी और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि उपस्थिति में अनियमितता हो सकती है, जिसके चलते सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

विधायक तक पहुंची शिकायत
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शिकायत क्षेत्र की विधायक रायमुनी भगत तक भी पहुंच चुकी है। नागरिकों ने उनसे मांग की है कि फलों की बिक्री, राजस्व प्राप्ति और विभागीय खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जांच की मांग हुई तेज
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए। इसमें फलों की बिक्री, प्राप्त राजस्व, श्रमिकों का भुगतान और उपस्थिति पंजी सहित सभी दस्तावेजों की समीक्षा की जाए।
नागरिकों का कहना है कि सरकारी विभाग जनता के संसाधनों से संचालित होते हैं, इसलिए हर गतिविधि में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। यदि कोई अनियमितता नहीं है, तो जांच से विभाग की छवि भी साफ होगी।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या इस मामले में जांच होगी और क्या उठ रहे सवालों का जवाब जनता को मिलेगा—यह आने वाला समय ही तय करेगा।

