विशेष रिपोर्ट
नीलेश सोनी
छत्तीसगढ़. रायपुर
देशभर में किसानों को मिलने वाली खाद (उर्वरक) के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। विभिन्न राज्यों से मिल रही शिकायतों के आधार पर यह खुलासा हुआ है कि खाद वितरण प्रणाली में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हो रही हैं, जिससे गरीब और आदिवासी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
युवा कांग्रेस के सोनहत ब्लॉक अध्यक्ष प्रकाश चंद्र साहू ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए कहा कि “किसानों के हक की खाद में किसी भी प्रकार की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह सीधे-सीधे किसानों के अधिकारों का हनन है।”

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खाद वितरण में सामने आई प्रमुख अनियमितताएं:
1. कालाबाजारी:
सरकारी दर पर मिलने वाली खाद को अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।
2. जबरदस्ती टैगिंग:
खाद के साथ बीज, दवा या अन्य सामान खरीदने के लिए किसानों को मजबूर किया जाता है।
3. स्टॉक छुपाना:
गोदाम में खाद उपलब्ध होने के बावजूद “स्टॉक खत्म” बताया जाता है।
4. पक्षपात:
परिचित या प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता देकर खाद दी जाती है।
5. फर्जी एंट्री:
रिकॉर्ड में वितरण दिखाकर वास्तविक किसानों को खाद नहीं मिलती।
6. कम मात्रा देना:
बिल पूरी मात्रा का, लेकिन वितरण कम किया जाता है।
7. बिचौलियों को लाभ:
सीधे किसानों के बजाय दलालों के माध्यम से खाद पहुंचाई जाती है।
8. कृत्रिम कमी पैदा करना:
जानबूझकर कमी दिखाकर बाद में महंगे दामों पर बिक्री।
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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
युवा कांग्रेस और अन्य किसान संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की है कि:
खाद वितरण प्रणाली की निष्पक्ष जांच हो
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
किसानों को पारदर्शी और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित किया जाए
प्रकाश चंद्र साहू ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप ले सकता है।
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प्रशासन के लिए चुनौती
यह मामला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों से इसी प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है।
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किसानों की आजीविका पूरी तरह कृषि पर निर्भर है, और खाद उसकी रीढ़ है। ऐसे में यदि खाद वितरण में भ्रष्टाचार जारी रहता है, तो यह न केवल किसानों बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
“किसानों के हक की खाद में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब समय की मांग है।”

