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एमसीबी-महिला उत्पीड़न के मामलों पर राज्य महिला आयोग सख्त, एमसीबी और कोरिया के लंबित प्रकरणों की सुनवाई 24 जून को..

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एमसीबी/10 जून 2026/ महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े मामलों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं कोरिया जिले के लंबित प्रकरणों की संयुक्त सुनवाई 24 जून 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आयोग के सचिव द्वारा संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आधिकारिक पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए हैं।

अमृत सभाकक्ष में होगी विशेष सुनवाई
आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 24 जून 2026 को प्रातः 11.00 बजे से जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के अमृत सभाकक्ष में सुनवाई आयोजित की जाएगी। इस विशेष बैठक में महिला उत्पीड़न से जुड़े कुल 09 निर्धारित प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी। मामलों की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. श्रीमती किरणमयी नायक तथा सदस्य श्रीमती प्रियम्बदा सिंह जूदेव की गठित न्यायपीठ सुनवाई की कार्यवाही संपादित करेगी।

पुलिस अधीक्षकों को जारी किए गए सख्त निर्देश
राज्य महिला आयोग ने एमसीबी, कोरिया, सरगुजा एवं सूरजपुर जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित थाना प्रभारियों के माध्यम से सभी आवेदिकाओं एवं अनावेदकों को अनिवार्य रूप से नोटिस तामील कराएं। आयोग ने यह भी कहा है कि नोटिस तामिली की पावती शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि सुनवाई की तिथि पर सभी पक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके और मामलों का प्रभावी निराकरण हो सके।

सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था के लिए विशेष व्यवस्था
सुनवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने पुलिस प्रशासन को विशेष निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुनवाई स्थल पर एक जिम्मेदार अधिकारी, एक पुरुष आरक्षक तथा एक महिला आरक्षक की अनिवार्य रूप से ड्यूटी लगाई जाए, जिससे सुनवाई प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

स्थानीय स्तर पर न्याय दिलाने की पहल
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग अधिनियम की धारा 10(3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग द्वारा यह कदम उठाया गया है। आयोग का उद्देश्य महिलाओं से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करना तथा पीड़ित महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। राज्य महिला आयोग की यह पहल महिला अधिकारों की सुरक्षा, न्यायिक पहुंच को सुदृढ़ करने तथा महिला उत्पीड़न के मामलों में संवेदनशील एवं प्रभावी हस्तक्षेप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है1

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