— गणेश सोनी
सिटी रिपोर्टर, वशिष्ठ टाइम
शहडोल/जयसिंहनगर (अमझोर) |
जिले के जयसिंहनगर तहसील अंतर्गत अमझोर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविकता चौंकाने वाली और बेहद चिंताजनक है। यहां शाम 7:00 बजे के बाद पूरा अस्पताल वीरान हो जाता है, मानो यह कोई सरकारी संस्थान नहीं बल्कि परित्यक्त भवन हो।
ताजा मामला तब सामने आया जब एक घायल मरीज को उपचार हेतु शाम के समय अस्पताल लाया गया। मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि अस्पताल में एक भी जिम्मेदार स्टाफ मौजूद नहीं था। डॉक्टर अनुपस्थित थे और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी थीं।
जांच करने पर यह भी सामने आया कि कंपाउंडर अपने कक्ष में आराम कर रहे थे और पूछताछ करने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी ड्यूटी समाप्त हो चुकी है। वहीं, सफाई कर्मी, जिसकी ड्यूटी शाम तक निर्धारित है, बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाया गया।
यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की घोर लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि अस्पताल में रखे सरकारी उपकरणों और दवाइयों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। ऐसे हालात में चोरी या अन्य अप्रिय घटनाओं की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी अस्पताल ही समय से पहले “बंद” हो जाएं, तो ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज आखिर जाएं तो जाएं कहां? यह लापरवाही सीधे तौर पर आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
प्रशासन और जिम्मेदार विभागों से मांग:
स्वास्थ्य विभाग, जिला पंचायत शहडोल एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को इस गंभीर लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, अस्पताल में 24×7 स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
जब तक ऐसी लापरवाह कार्यप्रणाली पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है।

