Report Nilesh Sony
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत हाल ही में संपन्न आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है।
जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के सिरौली, चैनपुर सहित कई ग्राम पंचायतों से प्राप्त शिकायतों और सूत्रों के हवाले से भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पक्षपात एवं पारदर्शिता के अभाव के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब प्रशासनिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित मानकों की अनदेखी कर पात्र अभ्यर्थियों को दरकिनार करते हुए प्रभावशाली वर्गों के दबाव में चयन किया गया।
इससे न केवल योग्य उम्मीदवारों में असंतोष व्याप्त है, बल्कि शासन की मंशा और विभागीय विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
इस संदर्भ में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के समक्ष भी यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील होता जा रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से यह आवश्यक हो गया है कि विभाग इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट और कठोर रुख अपनाए, जिससे आमजन में विश्वास बहाल किया जा सके।

वहीं, जिले के कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में मानी जा रही है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी गुलाब कमरो द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्तियों में अनियमितताओं को लेकर आवाज उठाई जा चुकी है, जिससे यह मामला पहले से ही संवेदनशील बना हुआ था।
सामाजिक दृष्टिकोण से यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका ग्रामीण स्तर पर महिला सशक्तिकरण, कुपोषण उन्मूलन एवं बाल विकास की रीढ़ मानी जाती हैं। यदि उनकी भर्ती में ही अनियमितता होगी, तो योजनाओं की जमीनी प्रभावशीलता पर प्रतिकूल असर पड़ना स्वाभाविक है।
यदि इस प्रकरण में समय रहते पारदर्शी जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मुद्दा आगामी चुनावी परिदृश्य में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है —
क्या प्रशासन इस बार निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों तक पहुंचेगा, या यह मामला भी पूर्व की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

