छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नौकरी से बर्खास्त किए गए कर्मचारी के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले में बाद में बरी हो जाने मात्र से कर्मचारी को बर्खास्तगी अवधि का पूरा पिछला वेतन पाने का अधिकार नहीं मिल जाता।
यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी के पूर्व कर्मचारी प्रसाद नायक (70 वर्ष) से जुड़ा है। वर्ष 2012 में, एक निचली अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था।
बिजली कंपनी ने 2021 में उनका बर्खास्तगी आदेश वापस ले लिया और उन्हें सांकेतिक रूप से सेवा निरंतरता का लाभ देते हुए पेंशन संबंधी सुविधाएं प्रदान कर दीं।
लेकिन कंपनी ने अप्रैल 2013 से अगस्त 2018 तक की अवधि का वेतन, एरियर और अन्य वित्तीय लाभ देने से इनकार कर दिया।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने पहले सिंगल बेंच द्वारा दिए गए आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि केवल आपराधिक मामले में बरी हो जाने से कर्मचारी स्वतः ही पूरे पिछले वेतन का हकदार नहीं हो जाता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा, जहां कर्मचारी आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के आधार पर सेवा से हटाए जाते हैं और बाद में उच्च अदालत से राहत प्राप्त करते हैं। फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि बरी होने के बावजूद पिछला वेतन स्वतः नहीं मिलेगा।

