सूरजपुर जिला मुख्यालय में नए वनमण्डलाधिकारी की पदस्थापना के बाद से विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, वनमण्डलाधिकारी कार्यालय में कम ही दिखाई देते हैं, जबकि पूरे वनमण्डल के अधिकारी एवं कर्मचारी उनके निर्देशों और मार्गदर्शन में कार्य करते नजर आ रहे हैं। विभागीय गतिविधियों को लेकर अब प्रशासनिक कार्यशैली पर चर्चा तेज हो गई है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक, विभाग में सामग्री खरीदी को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि अल्ट्राटेक सीमेंट की खरीदी का बिल लगभग 180 रुपये प्रति बोरी की दर से बनाकर राशि आहरित कर ली गई, जबकि संबंधित कार्यों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं चर्चा यह भी है कि वनमण्डलाधिकारी का अधिकांश कार्यालयीन कार्य उनके सरकारी निवास एवं बंगले से संचालित हो रहा है।
सूरजपुर में नए वनमण्डलाधिकारी के पदभार संभालने के बाद से विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में बढ़ोतरी होने की बातें आम लोगों और विभागीय गलियारों में लगातार सुनने को मिल रही हैं।
सूत्रों का दावा है कि वनमण्डलाधिकारी पर कथित रूप से कुछ प्रभावशाली नेताओं एवं उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बावजूद उन पर किसी प्रकार का दबाव या कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। बताया जा रहा है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कई लोगों द्वारा विभाग से विभिन्न जानकारियां मांगी गईं, लेकिन आरोप है कि आर्थिक प्रभाव के चलते कई महत्वपूर्ण सूचनाओं को दबाने एवं उपलब्ध नहीं कराने की कोशिश की जा रही है।
चर्चा यह भी है कि अधिकांश प्रशासनिक एवं विभागीय कार्य वनमण्डलाधिकारी द्वारा अपने बंगले से ही संचालित किए जा रहे हैं। विभागीय जानकार बताते हैं कि वे पूर्व में भी सूरजपुर में पदस्थ रह चुके हैं और उनके कार्यकाल को लेकर पहले भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि विभाग में वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। मामले से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज आगे सामने आने की संभावना बताई जा रही है। यह समाचार मिली जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।

