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शहडोल/जयसिंहनगर-स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण—स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप, विधायक व कलेक्टर से मौके पर जांच की मांग ग्राम पंचायत चितरांव…….

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शहडोल/जयसिंहनगर
(विशेष संवाददाता):
गणेश सोनी/सिटी रिपोर्टर
जिला शहडोल

जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चितरांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर नजर आ रही है।

देश की आज़ादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में पीने के पानी जैसी प्राथमिक आवश्यकता भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर वर्षों से योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागज़ों में सिमटा हुआ है। 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गांव में न तो स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था है और न ही शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित सुधार देखने को मिलता है।

स्थिति यह है कि कई परिवारों को आज भी दूर-दराज़ के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है, जिससे दैनिक जीवन अत्यंत कठिन हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारी—विशेष रूप से सचिव और सरपंच—मौके पर कम ही दिखाई देते हैं और समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीन बने हुए हैं।

प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही समस्याओं के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो निरीक्षण हुआ और न ही सुधारात्मक कदम उठाए गए।

विधायक और कलेक्टर से सीधा हस्तक्षेप मांग

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक और शहडोल कलेक्टर से मांग की है कि वे स्वयं ग्राम पंचायत चितराव का दौरा कर भौतिक सत्यापन करें,

ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके। उनका कहना है कि जब तक उच्च स्तर से सख्त हस्तक्षेप नहीं होगा, तब तक हालात में सुधार संभव नहीं है।


जवाबदेही तय करने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना जरूरी है।

इससे न केवल जवाबदेही तय होगी, बल्कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर भी अंकुश लगेगा।

निष्कर्ष:
ग्राम पंचायत चितरांव की स्थिति यह दर्शाती है कि विकास योजनाओं के बावजूद यदि निगरानी और क्रियान्वयन में कमी हो, तो आमजन तक उसका लाभ नहीं पहुंच पाता।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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