समाचार Nilesh sony
भरतपुर–सोनहत/छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नए विमर्श की शुरुआत होती दिख रही है, जहां पारंपरिक सत्ता बनाम विपक्ष की राजनीति से आगे बढ़कर “जनाधिकार और संसाधन संरक्षण” केंद्र में आ गया है। इसी कड़ी में Shyam Singh Markam, राष्ट्रीय महासचिव, Gondwana Ganatantra Party ने अपने क्षेत्रीय दौरे के दौरान एक वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल प्रस्तुत किया, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।
मरकाम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था ग्रामीण भारत, विशेषकर आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं को समझने और समाधान देने में असफल रही है।
उन्होंने बिजली संकट, कृषि अव्यवस्था, पशु चिकित्सा की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को “व्यवस्था की गहरी खामियां” बताते हुए व्यापक बदलाव की जरूरत बताई।
“विकास बनाम अधिकार” नहीं, बल्कि “विकास के साथ अधिकार” की बात
मरकाम ने अपने संबोधन में जोर दिया कि उनकी पार्टी विकास और संसाधनों के संरक्षण को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की पहचान और जीवन का आधार हैं।
यह दृष्टिकोण उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से अलग करता है, जहां अक्सर विकास परियोजनाओं और स्थानीय अधिकारों के बीच टकराव देखने को मिलता है।
नीतिगत वादों के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपने प्रस्तावित एजेंडे के जरिए एक स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि सत्ता में आती है, तो वह “कल्याणकारी राज्य” की अवधारणा को जमीनी स्तर पर लागू करेगी।

मुख्य घोषणाओं में शामिल हैं:
– सार्वभौमिक बिजली बिल माफी, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों वर्गों को राहत
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– कृषि क्षेत्र में समयबद्ध नीति और संसाधनों की गारंटी
– जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों की कानूनी सुरक्षा
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– वृद्धजनों के लिए सुनिश्चित पेंशन व्यवस्था
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– भूमिहीन मजदूरों को भूमि अधिकार प्रदान करना
– पशुपालन क्षेत्र के लिए आधुनिक चिकित्सा ढांचा
– भ्रष्टाचार और कालाबाजारी पर सख्त नियंत्रण
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का एजेंडा छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी क्षेत्रीय दलों की भूमिका को मजबूत कर सकता है।
खासतौर पर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह राजनीति “पहचान और अधिकार” के मुद्दों को फिर से केंद्र में ला सकती है।
जनता की नाराजगी को दिशा देने की कोशिश
मरकाम ने यह भी कहा कि प्रदेश के किसान, मजदूर, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग सभी मौजूदा व्यवस्था से निराश हैं।
ऐसे में उनकी पार्टी इस असंतोष को एक सकारात्मक राजनीतिक दिशा देने का प्रयास कर रही है।
क्या यह राष्ट्रीय विकल्प बन सकता है?
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का यह मॉडल केवल चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक वैचारिक हस्तक्षेप के रूप में उभर रहा है।
यदि यह जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाने में सफल रहता है, तो यह भारतीय राजनीति में “स्थानीय संसाधन आधारित विकास” की नई बहस को जन्म दे सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह पहल छत्तीसगढ़ की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली विकल्प बन पाती है।

