Report Nilesh Soni
छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित संरक्षित वन क्षेत्र गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक वन्यजीव खोज सामने आई है।
यहां पहली बार दुर्लभ प्रजाति इंडियन जायंट स्क्विरल (Ratufa indica) का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिसने पूरे राज्य में चर्चा और उत्साह का माहौल बना दिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय टीम द्वारा किए गए इस रिकॉर्डिंग कार्य को जैव विविधता संरक्षण के दृष्टिकोण से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पेड़ों की ऊंची छतरियों में रहने वाली यह रंग-बिरंगी विशाल गिलहरी आमतौर पर घने वनों में ही दिखाई देती है और इसका दिखना किसी भी क्षेत्र की स्वस्थ पारिस्थितिकी का संकेत माना जाता है।

जानकारी के अनुसार, जब इस दुर्लभ प्रजाति का पहली बार दस्तावेजीकरण किया गया, तब यह खबर तेजी से प्रदेशभर के अखबारों और मीडिया में छा गई।
वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और आमजन के बीच इस खोज को लेकर खासा आकर्षण देखने को मिला। यह उपलब्धि न केवल उद्यान की जैव विविधता को समृद्ध दर्शाती है, बल्कि इस क्षेत्र में वन संरक्षण के सफल प्रयासों को भी उजागर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडियन जायंट स्क्विरल का इस क्षेत्र में पाया जाना भविष्य में और भी नई प्रजातियों के मिलने की संभावना को मजबूत करता है।
साथ ही यह खोज वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिससे क्षेत्र की पहचान और पर्यटन संभावनाओं को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

