📍 विशेष रिपोर्ट |
सोनहत-बैकुंठपुर मार्ग, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
सोनहत वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बैकुंठपुर–सोनहत मुख्य मार्ग पर काचाडाड के समीप स्थित हरे-भरे जंगल में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आग लगाए जाने की घटना सामने आई है।
इस आगजनी ने देखते ही देखते विशाल वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे बहुमूल्य वन संपदा, जड़ी-बूटियाँ और जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही घंटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जंगल का वह हिस्सा, जो कभी हरियाली से भरपूर था, अब राख के ढेर में तब्दील हो चुका है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि समय पर आग बुझाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी, जिससे नुकसान और अधिक बढ़ गया।
🔥 सवाल ?
इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि—
आग लगने के दौरान मौके पर न तो फायर कंट्रोल की टीम समय पर पहुंची
वन परिक्षेत्र अधिकारी, रेंजर, डिप्टी रेंजर एवं बीट गार्ड की सक्रियता न रही
आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया का अभाव साफ नजर आया
ऐसी परिस्थितियों में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब जंगल जल रहे थे, तब जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां थे?




🌿 पर्यावरण और जनजीवन पर असर
इस आग ने न केवल पेड़-पौधों को नष्ट किया, बल्कि वन्यजीवों के जीवन पर भी खतरा पैदा कर दिया है।
पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ती हैं
औषधीय पौधों की प्रजातियों को खत्म करती हैं
स्थानीय जलवायु पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं
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स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई एवं वन विभाग की जवाबदेही तय करने की बात कही जा रही है।
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सोनहत वन परिक्षेत्र में हुई यह आगजनी केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते वन संरक्षण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले समय में ऐसे नुकसान और भी भयावह रूप ले सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या कार्रवाई होती है।

