शहडोल/चितरांव | वशिष्ट टाइम विशेष रिपोर्ट गणेश सोनी जिला रिपोर्टर
सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर “आयुष्मान आरोग्य मंदिर” जैसी योजनाओं को धरातल पर उतार रही है,
वहीं जमीनी हकीकत इन योजनाओं की बदहाल तस्वीर पेश कर रही है। जनपद क्षेत्र अंतर्गत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर चितरांव इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है।
करीब एक वर्ष पूर्व भवन निर्माण पूर्ण होने के बावजूद आज तक अस्पताल में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
भवन में पंखे तो लगाए गए हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने से वे सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। अस्पताल परिसर में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है, जिससे वहां रहने वाली ग्रुप-डी कर्मचारी भी भारी परेशानियों का सामना कर रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र में न डॉक्टर की नियुक्ति है, न नर्स मौजूद है और न ही दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था। यदि अचानक कोई मरीज स्वास्थ्य केंद्र पहुंच जाए तो उसे प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ नाम का रह गया है, जबकि वास्तविक सुविधाएं शून्य हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच-सचिव सहित जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस स्वास्थ्य केंद्र की ओर बिल्कुल नहीं है। करोड़ों की योजनाएं बनती हैं,
भवन तैयार होते हैं, लेकिन संचालन और व्यवस्थाओं के अभाव में जनता को उसका लाभ नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब सरकार वेतन, संसाधन और योजनाओं के लिए धन उपलब्ध करा रही है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं?
जनता की सेवा के लिए नियुक्त लोग यदि संवेदनहीन हो जाएं, तो योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
वशिष्ट टाइम के माध्यम से क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर चितरांव में तत्काल बिजली, पानी, डॉक्टर, नर्स और दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

