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“TET अब बना शिक्षकों के भविष्य का फैसला!” मध्य प्रदेश में शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य, प्रमोशन से लेकर नौकरी तक पर पड़ेगा सीधा असर……………

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भोपाल/नई दिल्ली।
विशेष रिपोर्ट/ गणेश सोनी सिटी रिपोर्टर जिला शहडोल

मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और नई भर्ती के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और शिक्षा विभाग की तैयारियों के बाद यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा में अभी पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर TET उत्तीर्ण करना होगा। ऐसा नहीं करने पर नौकरी और पदोन्नति दोनों प्रभावित हो सकती हैं। वहीं जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति निकट है,

उन्हें कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन बिना TET के प्रमोशन पर रोक लग सकती है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक भर्ती और सेवा से जुड़े मामलों में स्पष्ट किया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET न्यूनतम योग्यता है।

इसके बाद कई राज्यों ने अपनी नीतियों में बदलाव शुरू कर दिए हैं। मध्य प्रदेश सरकार भी इसी दिशा में नया आदेश तैयार कर रही है।

राज्य के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जिलों को दिशा-निर्देश भेजे जाने की खबरों के बाद शिक्षक संगठनों में चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित की जा सकती है।

नई भर्ती और प्रमोशन दोनों में TET जरूरी

नई व्यवस्था के अनुसार:

नई शिक्षक भर्ती में TET पास उम्मीदवारों को ही प्राथमिकता मिलेगी

कार्यरत शिक्षकों के प्रमोशन में TET अनिवार्य माना जाएगा

पात्रता परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं

विभागीय रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया भी कड़ी होगी

1 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होने की आशंका

रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जो पुराने नियमों के तहत नियुक्त हुए थे और उन्होंने TET परीक्षा नहीं दी थी। अब नई अनिवार्यता के कारण लगभग 1 लाख से अधिक शिक्षकों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

शिक्षक संगठनों में नाराजगी

राज्य के कई शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक नई पात्रता लागू करना अन्यायपूर्ण है।

कई संगठनों ने सरकार से पुराने शिक्षकों को छूट देने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।

शिक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि TET लागू होने से शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, लेकिन सरकार को अनुभवी शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।

उनका कहना है कि प्रशिक्षण, तैयारी समय और स्पष्ट नीति के बिना लाखों शिक्षकों पर दबाव बढ़ सकता है

देशभर में बन सकता है बड़ा मुद्दा

मध्य प्रदेश के बाद अन्य राज्यों में भी ऐसी नीतियों पर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षा जगत में इसे “राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता सुधार” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षक भर्ती प्रणाली में और सख्ती ला सकती हैं।

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