| विशेष संवाददाता/गणेश सोनी सिटी रिपोर्टर जिला शहडोल
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय उद्यमिता एवं डेयरी प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन सफलतापूर्वक किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन कृषि एवं पशुपालन आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण युवाओं और किसानों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी देने के उद्देश्य से किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम कुलगुरु डॉ. (प्रो.) मनदीप शर्मा के मार्गदर्शन तथा अधिष्ठाता डॉ. अजीत प्रताप सिंह की अध्यक्षता एवं दिशा-निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के विस्तार सेवाओं के निर्देशन में किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आधुनिक डेयरी फार्मिंग, पशुपालन प्रबंधन, डेयरी नस्लों की विशेषताएं, पशुओं के संतुलित आहार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक, डेयरी उत्पादों का मूल्य संवर्धन तथा डेयरी व्यवसाय से जुड़े स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी गई।

विषय विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों से डेयरी व्यवसाय संचालित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनने तथा डेयरी आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
समापन अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नितेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम संचालन में डॉ. सुमन संत, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. अभिलाषा सिंह एवं डॉ. राजकुमार पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों और पशुपालकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

