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शहडोल- “मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में जल संकट चरम पर: चितराव पंचायत में सूखे नल, खाली बोर और प्रशासनिक उदासीनता ने बढ़ाई ग्रामीणों की पीड़ा”…………..

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📍 विशेष रिपोर्ट |
गणेश सोनी सिटी रिपोर्टर
जिला शहडोल

मध्यप्रदेश के
शहडोल जिले अंतर्गत जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चितरांव में भीषण जल संकट ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।

अप्रैल की तेज गर्मी के बीच यहां के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि जिम्मेदार तंत्र मौन साधे बैठा है।

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत स्तर पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। नल-जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइनें जगह-जगह से टूटी हुई हैं और अधिकांश नल सूखे पड़े हैं।

हालात इतने खराब हैं कि पंचायत क्षेत्र में बने बोरवेल भी पूरी तरह से खाली पड़े हैं, जिससे पानी की उपलब्धता शून्य के बराबर हो गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत सचिव और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

सामुदायिक स्वच्छता परिसर के सामने स्थित बोरवेल की खस्ता हालत इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं।

प्रशासनिक सवाल खड़े:
जिला पंचायत स्तर पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब सरकार जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है,

तब जमीनी हकीकत इतनी बदतर क्यों है?
क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी या फिर ग्रामीणों को यूं ही संकट झेलने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल:
स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है।

क्या जनप्रतिनिधि केवल चुनावी समय में ही सक्रिय रहते हैं?

ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल हस्तक्षेप कर पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, अन्यथा स्थिति और भयावह हो सकती है।

यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला शहडोल के कई ग्रामीण इलाकों में जल प्रबंधन और प्रशासनिक लापरवाही की व्यापक समस्या को उजागर करता है।

यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह संकट विकराल रूप ले सकता है।

तत्काल पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए

खराब नल-जल योजना की मरम्मत हो

जल संकट को आपदा मानकर विशेष राहत योजना लागू की जाए

“चितरांव ग्राम पंचायत की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जो कागजों में विकास दिखाती है और जमीन पर संकट छोड़ देती है।”

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