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“मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना पर उठे गंभीर सवाल: जर्जर बसें, बदहाल सुविधाएं और लापरवाह व्यवस्था से ग्रामीण त्रस्त”………….

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 विशेष रिपोर्ट | nilesh sony
(छत्तीसगढ़) | 02 मई 2026

पुरानी बसों के सहारे चल रही योजना, आए दिन खराबी से ठप सेवा — यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान दोनों खतरे में

ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अब सवालों के घेरे में है।

जमीनी हकीकत यह है कि योजना के नाम पर केवल पुरानी और जर्जर बसों को सड़कों पर उतार दिया गया है, जो न केवल बार-बार खराब हो रही हैं बल्कि यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के कोरिया  जिले कई ग्रामीण इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं,

जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में यात्रियों को बीच रास्ते में ही उतरकर वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।

सुविधाओं का घोर अभाव, यात्रियों के साथ अमानवीय व्यवहार

यात्रियों का आरोप है कि बसों में बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है, न ही साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। गर्मी के मौसम में हालत और भी खराब हो जाती है।

खिड़कियां टूटी हुई, सीटें जर्जर और भीड़ अत्यधिक — यह स्थिति किसी भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बसों में कार्यरत कुछ कंडक्टरों का रवैया भी अत्यंत असंवेदनशील बताया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे यात्रियों की समस्याओं को समझने के बजाय अभद्र व्यवहार करते हैं और शिकायतों को नजरअंदाज कर देते हैं।

प्रशासनिक लापरवाही या योजनागत विफलता?

यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करती है। करोड़ों रुपये खर्च कर चलाई जा रही योजना यदि जमीनी स्तर पर विफल हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।

परिवहन विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि बसों की फिटनेस, रखरखाव और संचालन की नियमित निगरानी नहीं हो रही है।

उचित निरीक्षण के पुरानी बसों को सेवा में शामिल करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ भी है।

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:

जर्जर बसों को तुरंत सेवा से हटाया जाए

नई और सुरक्षित बसों की व्यवस्था की जाए

कंडक्टर एवं स्टाफ को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाए

परिवहन विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए

 

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य सराहनीय था, लेकिन वर्तमान क्रियान्वयन ने इसे सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है।

यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो यह योजना ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि परेशानी का कारण बनती रहेगी।

प्रशासन को अब कागजी दावों से आगे बढ़कर वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

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