कोरिया (छत्तीसगढ़) |
विशेष रिपोर्ट निलेश सोनी
कोरिया जिले के सोनहत वन परिक्षेत्र अंतर्गत कछाड़ी बीट के जंगलों में बीती रात भीषण आग ने विकराल रूप ले लिया।
रात लगभग 9 बजे अलग-अलग स्थानों पर आग की लपटें उठती दिखाई दीं, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया।
राहगीरों द्वारा बनाए गए वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें साफ तौर पर जंगलों को जलते हुए देखा जा सकता है—लेकिन हैरानी की बात यह है कि मौके पर वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार कर्मी नजर नहीं आया।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की टीम रात के समय गश्त या सर्चिंग के लिए निकलती ही नहीं, जिससे ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा कि “जंगल जल रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं।”
यह आग सिर्फ पेड़-पौधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुर्लभ जड़ी-बूटियों, वन्य जीवों और लाखों रुपये की अमूल्य वन संपदा को भी निगल गई।
वर्षों से विकसित की गई हरियाली कुछ ही घंटों में राख में तब्दील हो गई। शासन द्वारा वन संरक्षण के नाम पर खर्च किए जा रहे लाखों-करोड़ों रुपये भी इस लापरवाही के सामने बेमानी साबित हो रहे हैं।
परिक्षेत्र स्तर के अधिकारियों से लेकर बीट स्तर के जिम्मेदार कर्मचारियों तक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि न तो समय पर निगरानी की जाती है और न ही आग बुझाने के लिए त्वरित कार्रवाई होती है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मामला बेहद संवेदनशील बनता जा रहा है।
विपक्षी दलों ने इसे शासन-प्रशासन की विफलता करार देते हुए कहा है कि यदि समय रहते निगरानी और प्रबंधन किया जाता, तो इस तरह की भीषण क्षति से बचा जा सकता था।
जंगलों में लगने वाली ऐसी आग केवल प्राकृतिक नहीं होती, बल्कि कई बार मानवीय लापरवाही और प्रबंधन की कमी इसका बड़ा कारण बनती है।
लगातार हो रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि वन विभाग के अंदर जवाबदेही और सतर्कता की गंभीर कमी है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक जंगलों की यह आग केवल पेड़ों को ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण संतुलन को जलाती रहेगी।

