विशेष रिपोर्ट/श्री राम राजवाडे जिला रिपोर्टर बैकुंठपुर
स्थान: बर्दिया, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़) |
ग्राम पंचायत बर्दिया में शासकीय एवं धार्मिक आस्था से जुड़ी जमीनों पर खुलेआम अतिक्रमण का मामला सामने आया है
, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजस्व विभाग की निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि देवालय को दान में दी गई भूमि, शिवरात्रि मेला परिसर, रास दोही स्थल, महादेव भूमि और यहां तक कि स्कूल परिसर की जमीन तक पर दबंगों द्वारा जेसीबी लगाकर कब्जा किया जा रहा है
—और जिम्मेदार तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है।
प्रशासनिक दृष्टि से—सीधी लापरवाही या मिलीभगत?
यह मामला सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। जिस भूमि की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी पंचायत और राजस्व विभाग की होती है,
वहां इस प्रकार का अतिक्रमण यह दर्शाता है कि या तो अधिकारी पूरी तरह निष्क्रिय हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।
स्थानीय स्तर पर न तो सीमांकन की प्रक्रिया दिखाई दे रही है, न ही अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस कार्रवाई—जो शासन की मंशा पर भी सवाल उठाती है।
राजस्व दृष्टि से—कानून का खुला उल्लंघन
राजस्व नियमों के तहत शासकीय और धार्मिक भूमि पर कब्जा गैरकानूनी है। बावजूद इसके, ग्रामीणों द्वारा इन जमीनों को अपनी निजी संपत्ति बताकर उपयोग में लेना यह दर्शाता है कि राजस्व अभिलेखों की अनदेखी और कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े स्तर पर राजस्व घोटाले का रूप ले सकता है।
राजनीतिक दृष्टि—जनप्रतिनिधियों की चुप्पी संदिग्ध
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है।
जहां एक ओर सरकार “अतिक्रमण मुक्त अभियान” की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर उसके ही कार्यकर्ता और जिम्मेदार लोग इन गतिविधियों पर मौन साधे हुए हैं।
यह स्थिति राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और संभावित संरक्षण की ओर इशारा करती है।
जन आक्रोश—“आस्था और अधिकार दोनों पर हमला”
ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सिर्फ जमीन कब्जाने का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सार्वजनिक संसाधनों और बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला है।
मांग—तत्काल कार्रवाई और जांच
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
अतिक्रमण की तत्काल जांच कराई जाए
जेसीबी से किए गए कब्जों को तुरंत हटाया जाए
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
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अगर बर्दिया जैसे गांवों में देवालय और स्कूल की जमीन भी सुरक्षित नहीं है, तो यह प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

