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“आयुष्मान आरोग्य मंदिर बना ‘नाम का स्वास्थ्य केंद्र’: सीधी उप स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाही चरम पर — मरीज बेहाल, जिम्मेदार मौन”………

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विशेष रिपोर्ट बनीमाधव कुशवाहा जिला रिपोर्टर 

शहडोल (जयसिंहनगर) |

सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है,

वहीं जिला शहडोल के ग्राम सीधी स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

यहां स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, केंद्र में तैनात कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते।

उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं—कभी 11 बजे, कभी 12 बजे तो कभी 1 बजे पहुंचते हैं और मात्र एक घंटे के भीतर केंद्र बंद कर अपने निवास लौट जाते हैं।

मरीजों की परेशानी बढ़ी:
स्वास्थ्य केंद्र की इस लचर व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।

छोटे-छोटे उपचार के लिए भी लोगों को दूरस्थ अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल:
सरकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की नीति के बावजूद इस तरह की लापरवाही कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

क्या आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल कागजों और योजनाओं तक ही सीमित रह गया है?

राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल:
इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या स्वास्थ्य मंत्री तक इस अव्यवस्था की जानकारी है?

विभागीय अधिकारी नियमित निगरानी क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

ग्रामीणों की मांग:
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही, उप स्वास्थ्य केंद्र में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

ग्राम सीधी का यह उप स्वास्थ्य केंद्र केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करता है।

यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो सरकार की योजनाएं आम जनता तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ती नजर आएंगी।

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