Home कोरिया “PM आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! जिओ-टैग के नाम पर हेराफेरी ग्राम...

“PM आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! जिओ-टैग के नाम पर हेराफेरी ग्राम पंचायत कैलाशपुर

22
0

खबर | निलेश सोनी….

“छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में हितग्राहियों से धोखाधड़ी, अधूरे मकानों पर पूरी राशि निकासी—
ग्राम पंचायत कैलाशपुर”

कोरिया (छत्तीसगढ़): केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिले के ग्राम पंचायत कैलाशपुर में सचिव और रोजगार सहायक पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने हितग्राहियों के नाम पर आवास की तीसरी किस्त तक की राशि निकाल ली, जबकि जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य अधूरा है।

सूत्रों के मुताबिक, आश्रित ग्राम तेलीमुड़ा निवासी हितग्राही सिगार साय (पिता–रामचरन, जाति–चेरवा) के नाम पर आवास की पूरी राशि आहरित कर ली गई,

लेकिन मौके पर वास्तविक निर्माण नहीं हुआ। आरोप है कि केवल औपचारिक ढांचा दिखाकर फर्जी जिओ-टैगिंग कर दी गई और दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि एक संगठित पैटर्न के तहत फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने और टालने में लगे हैं।

जब इस विषय में पंचायत सचिव से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से बचते हुए मामला टाल दिया। वहीं सरपंच ने भी लाचारगी जताते हुए कहा कि सचिव और रोजगार सहायक के सामने उनकी भूमिका सीमित है और वे प्रभावहीन हैं।

प्राथमिक दृष्टि में गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार

जिला पंचायत स्तर पर देखने पर यह मामला केवल एक पंचायत की गड़बड़ी नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करता है। यदि अधूरे निर्माण पर किस्तें जारी हुईं, तो यह स्पष्ट रूप से सत्यापन प्रक्रिया और फील्ड मॉनिटरिंग में भारी चूक को दर्शाता है।

जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच के नाम पर केवल समय बिताया जा रहा है।

ग्रामीणों की मांगें:

पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो

दोषी अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए

वास्तविक हितग्राहियों को उनका हक दिलाया जाए

योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए


सरकार जहां गरीबों को पक्के मकान देने की दिशा में प्रयासरत है, वहीं जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की यह तस्वीर योजना की विश्वसनीयता को आघात पहुंचा रही है।

यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर शासन-प्रशासन की साख पर गहरा असर डाल सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here