📍 विशेष रिपोर्ट | nilesh sony
कोरिया (छत्तीसगढ़)
कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में पंचायत व्यवस्था की जमीनी हकीकत प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है।
विकासखंड की कुल 42 ग्राम पंचायतों में से लगभग 14 पंचायतें ऐसी हैं, जहां एक ही सचिव को डबल और ट्रिपल प्रभार सौंप दिया गया है,
जबकि 4 पंचायतें पूरी तरह बिना सचिव के ही संचालित हो रही हैं।
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक असंतुलन को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि जिम्मेदार तंत्र या तो गंभीर रूप से उदासीन है या फिर इस अव्यवस्था के पीछे किसी प्रकार का संरक्षण तंत्र सक्रिय है।
मूल समस्या क्या है?
भरतपुर–सोनहत विधानसभा क्षेत्र के वनांचल और दूरस्थ इलाकों में सचिवों की भारी कमी बताई जा रही है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, तो भर्ती प्रक्रिया तेज क्यों नहीं की गई?
एक-एक सचिव पर 2 से 3 पंचायतों का भार डाल दिया गया है, जिससे वे किसी भी पंचायत में पूर्ण रूप से समय नहीं दे पा रहे।

परिणामस्वरूप, ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं—जैसे स्वच्छता, पेयजल, सड़क, और शासकीय योजनाओं का लाभ—गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
अनदेखी?
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14 पंचायतों में अतिरिक्त प्रभार देना क्या मजबूरी है या सुविधा?
4 पंचायतों को बिना सचिव के छोड़ना क्या लापरवाही नहीं?
जनता के अधिकारों पर सीधा असर
ग्रामीणों का कहना है कि सचिवों की अनुपस्थिति या अत्यधिक व्यस्तता के कारण:
योजनाओं की राशि समय पर नहीं मिलती
शिकायतों का समाधान लंबित रहता है
पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और मनमानी को बढ़ावा मिल रहा है
जवाबदेही तय कब होगी?
यह पूरा मामला अब जिला प्रशासन और राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
यदि शीघ्र ही सचिवों की भर्ती, पदस्थापना और कार्य विभाजन में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो यह समस्या और गहराएगी।
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तत्काल रिक्त पदों पर भर्ती
अतिरिक्त प्रभार की समीक्षा
पंचायत स्तर पर नियमित निगरानी तंत्र लागू किया जाए
सोनहत विकासखंड की यह स्थिति केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रशासन की कमजोर होती नींव का संकेत है।
यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो “गांव के विकास” का दावा केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

