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“3 लाख के गबन में पंचायत सचिव निलंबित: ई-ग्राम स्वराज में डीएससी दुरुपयोग का खुलासा, विभागीय जांच शुरू”……….

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रिपोर्ट | Nilesh Soni…….

कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई, राष्ट्रीय स्तर पर उठे डिजिटल पारदर्शिता पर सवाल

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला अंतर्गत ग्राम पंचायत केशगवां में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पंचायत सचिव श्यामलाल सूर्यवंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

मामला 15वें वित्त आयोग की करीब 3 लाख रुपये की राशि के कथित फर्जी आहरण और गबन से जुड़ा है, जिसने पंचायत स्तर पर डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच समिति ने मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान संबंधित सचिव न तो उपस्थित हुए और न ही जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए।

जांच में यह भी सामने आया कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सरपंच के यूजर प्रोफाइल में सचिव का मोबाइल नंबर दर्ज था। इससे प्रथम दृष्टया यह प्रमाणित हुआ कि सरपंच के डिजिटल हस्ताक्षर (DSC) का दुरुपयोग कर राशि का आहरण किया गया।

यह कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 तथा छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत नियम 1999 के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत सचिव के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम 1999 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

निलंबन अवधि में श्यामलाल सूर्यवंशी का मुख्यालय जनपद पंचायत सोनहत निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उपसंचालक (पंचायत), जिला कोरिया को जांच अधिकारी और जनपद पंचायत सोनहत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है।

प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पंचायत कार्य बाधित न हों। इसके लिए ग्राम पंचायत केशगवां का अतिरिक्त प्रभार मधला पंचायत के सचिव शिवनारायण साहू तथा बसवाही पंचायत का प्रभार तंजरा पंचायत के सचिव रामप्रकाश साहू को अस्थायी रूप से सौंपा गया है।

यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में लागू डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम, विशेषकर पंचायतों में उपयोग हो रहे पोर्टल्स की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

यदि समय रहते डिजिटल सत्यापन और निगरानी प्रणाली मजबूत नहीं की गई, तो इस प्रकार की अनियमितताएं अन्य राज्यों में भी सामने आ सकती हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

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