छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट से परिवार और नौकरी के बीच संतुलन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सास की देखभाल नहीं करने पर बहू की नौकरी तक खतरे में पड़ गई। इस फैसले ने न सिर्फ सामाजिक बल्कि कानूनी बहस भी छेड़ दी है।
अनुकंपा नियुक्ति व्यक्तिगत उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं है। यह पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने सरकार द्वारा दी जाने वली सहायता है।
अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी कर रही बहू को हिदायत देते हुए कोर्ट ने कहा, सास के भरणपोषण का ख्याल रखे, नहीं तो नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

बेटे की मृत्यु के बाद बहू नेहा तिवारी को राज्य सरकार ने इस शर्त पर अनुकंपा नियुक्ति दी। वह अपनी सास का पूरा ख्याल रखेगी। ज्ञांती देवी का आरोप है, नौकरी मिलते ही बहू का व्यवहार बदल गया। उसने उसके साथ दुर्व्यवहार करने के साथ ही दाने-दाने को मोहताज कर दिया। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
याचिकाकर्ता सास ने बहू की जगह अविवाहित पोती प्रीति तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया, बहू को इस शर्त और शपथ-पत्र के आधार पर नौकरी दी गई थी कि वह अपनी सास की पूरी देखभाल और भरण-पोषण करेगी, लेकिन नियुक्ति मिलते ही बहू ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है।

