रिपोर्ट — विशेष संवाददाता
बेनी माधव कुशवाहा
जिला रिपोर्टर
📍 ग्राम पंचायत सीधी (मध्य प्रदेश)
नल जल योजना की हकीकत उजागर, जिम्मेदारों की लापरवाही से शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर संकट
शासकीय प्राथमिक शाला कमरान टोला, ग्राम पंचायत सीधी के सामने नल जल योजना के तहत स्थापित पेयजल नल और हैंडपंप वर्षों से खराब पड़े हैं।
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि यह जल स्रोत लंबे समय से अनुपयोगी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
कई बार बच्चों को घर से पानी लाना पड़ता है या फिर पास के अन्य असुरक्षित स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहा है।
यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर करती है, बल्कि जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।


नल जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन यहां यह योजना महज कागजों तक सिमटकर रह गई है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
विभागीय उदासीनता इस कदर हावी है कि स्कूल परिसर के सामने ही खराब पड़े जल स्रोत को सुधारने की जहमत तक नहीं उठाई गई।
एक ओर सरकार ‘हर घर जल’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसे अभियान चला रही है, वहीं जमीनी स्तर पर हालात इन दावों की पोल खोल रहे हैं।

मांग:
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर खराब नल और हैंडपंप को सुधारने की मांग की है
,गर्मी के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। पानी की भारी किल्लत के चलते स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को पूरे गांव में पानी के लिए भटकना पड़ता है।
कई बच्चे दूर-दराज के घरों या असुरक्षित जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ताकि बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके और इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

